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Hiroshima and Nagasaki attack 6 and 9 august 1945 in Hindi

हिरोशिमा और नागासाकी (Hiroshima and Nagasaki)  में वो क़यामत की सुबह
1945 आते आते एक आम जापानी की ज़िंदगी बहुत मुश्किल हो चुकी थी दुकानों में अंडे, दूध, चाय और कॉफ़ी पूरी तरह से ग़ायब हो चुके थे. स्कूलों के मैदानों और घरों के बगीचों में सब्ज़ियाँ उगाई जा रही थीं. पेट्रोल भी आम लोगों की पहुंच से बाहर हो चुका था.
Hiroshima and Nagasaki attack 6 and 9 august 1945 in Hindi
Hiroshima and Nagasaki



1945 आते आते एक आम जापानी की ज़िंदगी बहुत मुश्किल हो चुकी थी दुकानों में अंडे, दूध, चाय और कॉफ़ी पूरी तरह से ग़ायब हो चुके थे. स्कूलों के मैदानों और घरों के बगीचों में सब्ज़ियाँ उगाई जा रही थीं. पेट्रोल भी आम लोगों की पहुंच से बाहर हो चुका था.

सड़कों पर एक भी निजी कार नहीं दौड़ रही थीं. हिरोशिमा की सड़कों पर हर तरफ़ साइकिलें, पैदल चलते लोग और सैनिक वाहन दिखाई देते थे.



6 अगस्त, 1945 को सुबह 7 बजे जापानी रडारों ने दक्षिण की ओर से आते अमरीकी विमानों को देख लिया. चेतावनी के सायरन बज उठे और पूरे जापान में रेडियो कार्यक्रम रोक दिए गए.



जापान में तब तक पेट्रोल की इतनी कमी हो चुकी थी कि उन विमानों को रोकने के लिए कोई जापानी विमान नहीं भेजा गया. आठ बजते बजते चेतावनी उठा ली गई और रेडियो कार्यक्रम फिर से शुरू हो गए.



8 बज कर 9 मिनट पर अमरीकी वायु सेना के कर्नल पॉल टिबेट्स ने अपने बी- 29 विमान 'एनोला गे' के इंटरकॉम पर घोषणा की, 'अपने गॉगल्स लगा लीजिए और उन्हें अपने माथे पर रखिए.
Hiroshima and Nagasaki attack 6 and 9 august 1945 in Hindi



हिरोशिमा पर गिरा ये वही  लिटिल बॉय है जिसने लोगों की सुबह को जिंदगी की शाम बना दिया 


ठीक 8 बज कर 15 मिनट पर 'एनोला गे' से नाक के बल 'लिटिल बॉय' हिरोशिमा के ऊपर गिरना शुरू हुआ.
लिटिल बॉय को एनोला गे से नीचे आने में पूरे 43 सेकेंड लगे. तेज़ हवाओं ने उसका रुख़ अपने लक्ष्य अओई ब्रिज से 250 मीटर दूर कर दिया और वो शीमा सर्जिकल क्लीनिक के ऊपर फटा. इसकी शक्ति 12500 टन टीएनटी के बराबर थI 
 और जब ये फटा तो तापमान अचानक दस लाख सेंटीग्रेड पहुंच गया और ऊपर से द ग्रेट आर्टिस्ट के पायलेट मेजर चार्ल्स स्वीनी ने एक विशाल आग का गोला बनता देखा.
शहर के मध्य में एक क्षण के अंदर कंक्रीट इमारतों को छोड़ कर धरती के ऊपर मौजूद हर चीज़ ग़ायब हो गई. विस्फोट का असर इतना तेज़ था कि ग्राउंड ज़ीरो से 15 किलोमीटर दूर हर इमारत की खिड़कियों के शीशे चकनाचूर हो गए.



एटम बम गिराने वाले विमान में क्या हुआ?
हिरोशिमा ( Hiroshima and Nagasaki ) शहर की दो तिहाई इमारतें एक सेकेंड के अंदर ध्वस्त हो गईं. कई किलोमीटर तक आग की एक आँधी सी फैल गई. एक क्षण में हिरोशिमा की कुल आबादी 2 लाख 50 हज़ार के 30 फ़ीसदी यानी 80 हज़ार लोग मौत की गर्त में समा गए.

जैसे ही विस्फोट हुआ 'एनोला गे' के आगे के केबिन में रोशनी फैल गई और पायलेट पॉल टिबेट्स ने अपने दाँतों में एक अजीब सी सिहरन महसूस की.

विमान के पिछले हिस्से में बैठे हुए टेल गनर बॉब कैरन ने अपना कोडक कैमरा उठाया और नीचे के दृश्य की तस्वीरें लेने लगे, नीचे के बैंगनी बादलों के बीच सफ़ेद धुएं का एक रेला 3000 फ़ीट तक उठा और उसने एक मशरूम की शक्ल बना ली.

एनोला गे के सह पायलट कैप्टेन रॉबर्ट लुइस ने अपनी लॉग बुक में लिखा, 'माई गॉड व्हाट हैव वी डन?' 'एनोला बे' के वेपेनियर विलियम पारसंस ने एक कूट संदेश भेजा, 'परिणाम सफल. विमान में हालात सामान्य.'

नीचे जब बम धरती से टकराया तो क्या हुआ?
नीचे जापानी नौसेना के ड्राफ़्ट्समैन सूतोमू यामागुची की नज़र ऊपर उड़ रहे विमान पर पड़ी. उन्हें दिखाई दिया कि विमान से एक छोटी, काली वस्तु नीचे गिर रही है. अगले ही पल उनकी आँखों के सामने अंधा कर देने वाली रोशनी फैल गई.
 उनके सभी संवेदी अंगों ने काम करना बंद कर दिया. उन्होंने उंगलियों से अपनी आँखें ढकीं और ज़मीन पर मुंह के बल गिरे.

उनके नीचे की घरती हिली और वो करीब आधा मीटर ऊपर उछले और फिर गिरे. जब उन्होंने अपनी आँखें खोली तो उनके चारों तरफ़ अंधेरा था.

अचानक उन्होंने महसूस किया कि अपने चेहरे के बांये हिस्से और बाईं बांह पर भयानक गर्मी महसूस की. उन्हें उल्टी करने की इच्छा महसूस हुई और वो बेहोश होने लगे. तभी उन्हें कुछ दूरी पर खड़ा एक पेड़ दिखाई दिया. उसकी सारी पत्तियाँ झड़ चुकी थीं.

Hiroshima and Nagasaki attack 6 and 9 august 1945 in Hindi
fat man
उन्होंने उस पेड़ तक पहुंचने के लिए अपनी सारी ताक़त लगा दी. किसी तरह वहां पहुंच कर वो उसके तने के नीचे बैठ गए. तब तक उनका गला पूरी तरह से सूख चुका था और पानी की एक बूंद के लिए वो तरस रहे थे.

और जो बच गए...
हिरोशिमा के पूर्वी इलाके में एक ट्रेन शहर की तरफ़ बढ़ रही थी. अचानक सैनिकों ने चलती ट्रेन रोक कर सब यात्रियों को नीचे उतर जाने के लिए कहा.

डिब्बों को इंजिन से अलग कर वहीं रोक दिया गया लेकिन इंजिन आगे बढ़ता चला गया. लेकिन वो बहुत आगे नहीं जा पाया क्योंकि रेलवे लाइन पैदल शहर छोड़ कर जाने वाले लोगों से भरी हुई थी.

उनमें से कुछ लोगों की त्वचा उनके चेहरे से लटक आई थी और कुछ की बाहें इस तरह से झूल रही थीं जिस तरह दीवार से आधा फटा पोस्टर झूलता है. कुछ लोग बहुत धीरे धीरे चल रहे थे और उनके मुंह से सिर्फ़ आवाज़ निकल रही थी, 'पानी, पानी!'

'क्या मैं मरने जा रही हूँ?'
करीब 11 बजे एटम बम विस्फोट से पैदा हुए बादलों की वजह से हिरोशिमा में तेज़ बारिश होने लगी थी. ये काली बारिश थी जिसमें गंदगी, धूल और विस्फोट से उत्पन्न हुए रेडियोएक्टिव तत्व मौजूद थे.

वास्तव में काले रंग से भी गहरी बारिश थी, कुछ कुछ ग्रीस की तरह जो दीवारों और कपड़ों पर अमिट निशान छोड़ रही थी. उधर पत्ते रहित पेड़ के नीचे बैठे यामागुची को रेडियो एक्टिव बारिश का सामना नहीं करना पड़ रहा था. 
थोड़ी दूर पर उन्हें एक गड्ढ़ा दिखाई दिया. जब वो वहाँ रेंगते हुए पहुंचे तो वहाँ उन्हें एक महिला पड़ी हुई दिखाई दी.

उसके सारे कपड़े जल चुके थे और उसकी गाल भी जल कर लाल हो चुकी थी. उसने उठने की कोशिश की, लेकिन गिर पड़ी. वो बगैर किसी को संबोधित करते हुए बुदबुदा रही थी, मदद करो, मदद करो!

यामागुची को देखते ही उसने बहुत धीमी आवाज़ में पूछा, 'क्या मैं मरने जा रही हूँ?' तभी वहाँ दो लड़के पहुंच गए, जिन्हें कुछ भी नहीं हुआ था. उन्होंने यामागुची से कहा, 'आप बुरी तरह से जल गए दिखते हैं.'

यामागुची ने अपने चेहरे को धीरे से छुआ. उन्हें लगा कि उनके चेहरे से उनकी खाल उतर कर उनके हाथ में आ रही है. उनकी बांह काली पड़ गई थी और लगातार सूजती जा रही थी.

वो छात्र यामागुची को लेकर एक क्लीनिक पहुंचे. वहाँ पर जले हुए शव पड़े हुए थे. कुछ लोगों के हाथों में थोड़ी बहुत हरकत थी लेकिन अधिकतर शरीर बिना किसी हरकत के पड़े हुए थे. वहाँ पर एक कंपाउंडर ने यामागुची के चेहरे पर सफ़ेद मलहम लगाया और उसकी बांह पर पट्टी बाँधी.

वहाँ पर उन्हें दो बिस्कुट और तोड़ा पानी दिया गया. जैसे ही उन्होंने बिस्कुट का एक टुकड़ा खाया, उनको उल्टी हो गई.

हिरोशिमा की तबाही देखने वाले पहले पत्रकार
उधर 37 वर्षीय स्थानीय पत्रकार सातोशी नाकामूरा भाग्यशाली थे कि उन्होंने उस दिन हिरोशिमा से थोड़ी दूर अपने एक दोस्त के साथ रात बिताई थी. जब हिरोशिमा पर एटम बम गिरा तो उसके असर से वो ज़मीन पर गिर पड़े और
 उनके चेहरे को टूटे हुए शीशों ने घायल कर दिया. उन्होंने अपनी साइकिल उठाई और हिरोशिमा की तरफ़ बढ़ने लगे.
Hiroshima and Nagasaki attack 6 and 9 august 1945 in Hindi

वो हिरोशिमा की बरबादी देखने वाले पहले पत्रकार थे. उन्होंने डौमी समाचार एजेंसी के ओकायामा दफ़्तर में पहला डिसपैच डिक्टेट कराया, '8 बज कर 16 मिनट पर दुश्मन के दो विमानों ने हिरोशिमा पर एक ख़ास बम गिराया है.
 हिरोशिमा पूरी तरह से बरबाद हो चुका है और करीब 1 लाख 70 हज़ार लोग हताहत हुए हैं.'
जब डौमी के ब्यूरो चीफ़ ने ये सुना तो उन्होंने नाकामूरा से कहा है कि ये सच नहीं हो सकता कि एक बम से हिरोशिमा में इतने लोग मर गए हैं. उन्होंने उनसे कहा कि वो अपनी रिपोर्ट हताहतों की संख्या बदल दें,
 क्योंकि सेना इसे मानने से इंकार कर रही है. नाकामुरा ने टेलीफ़ोन लाइन पर चिल्लाते हुए कहा, 'सेना मूर्ख है.'
तीन दिन बाद नागासाकी पर फटा 'फैट मैन'
9 अगस्त, 1945. जापान के एक और नगर नागासाकी की दोपहर. जब बी-29 बमवर्षक ने वहाँ दूसरा एटम बम गिराया तो उसे नीचे पहुंचने में पूरे 43 सेकेंड लगे. बम गिरने के 1 किलोमीटर के दायरे में मौजूद हर चीज़ धराशाई हो गई.

ऊष्मा की किरणों ने मानव शरीर से जल की एक एक बूंद को सोख लिया. बहुत से लोग और जानवर उसी क्षण मर गए. धमाका इतना तेज़ था कि 8 किलोमीटर दूर बने घरों के शीशों के परखच्चे उड़ गए. विस्फोट से उपजी रोशनी
 हांलाकि सिर्फ़ कुछ सेकेंडों तक रही लेकिन उससे उपजी ऊष्मा ने त्वचा को थर्ड डिग्री बर्न्स से जला दिया.

बम गिरने की जगह से 500 मीटर दूर शिरोयामा प्राइमरी स्कूल में कंक्रीट के कंकाल के अलावा कुछ नहीं बचा. वहाँ खड़ी चियोको इगाशिरा को एक भयानक धमाका सुनाई दिया और उन्हें ऐसा लगा कि उनकी पीठ में मांस का एक हिस्सा उड़ गया है.

उन्होंने हगल में खड़ी अपनी बेटी को अपने शरीर से कवर किया. जब उन्होंने उसकी तरफ़ देखा तो उसके सिर का एक एक बाल खड़ा हो गया था लेकिन उसकी भौं में एक भी बाल नहीं बचे थे. उसने मदद के लिए चिल्लाने की कोशिश की, लेकिन उसके मुंह से कोई आवाज़ नहीं निकल सकी.

जहां बम गिरा वहां से डेढ़ किलोमीटर दूर...
अस्पताल के बाहर कोई भी चीज़ पहचान में नहीं आ रही थी. वहाँ मौजूद सुनिओ तोमीता ने नीचे गिरे अपने दोस्त कामोतो को उसके कंधों से उठाने की कोशिश की, लेकिन उनके हाथ में उनके कंधे का मांस आ गया और वो फिर नीचे गिर पड़े.

ज़्यादातर मरने वाले या मरते लोगों के मुंह से झागदार ख़ून निकल रहा था. तोमीता उनके बीच जा कर उन्हें पानी दे रहे थे और उनका हौसला बढ़ा रहे थे लेकिन थोड़ी देर बाद वो और प्रोफ़ेसर सिकी ही ज़िंदा बचे थे.

उनके चारों ओर करीब 20 लाशें बिछी हुई थीं. जहाँ तक देखो आग की लपटें उठती हुई दिखाई दे रही थीं. विस्फ़ोट स्थल से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर एक टॉरपीडो फ़ैक्ट्री में मित्सुई तकीनो भी ज़मीन पर गिरी बेहोश पड़ी थी.

जब उन्हें होश आया तो उन्हें चारों तरफ़ लोगों की चीख़ पुकार सुनाई दी. उनके ऊपर ढेर सारा मलबा गिरा पड़ा था.

बहुत मशक्कत के बाद वो अपने दाहिने हाथ को आज़ाद करवा पाने में सफल हो गईं, उनके नीचे फर्श पर उन्हें कुछ नमी महसूस हुई.

जब उन्होंने अपने सिर को छुआ तो उन्होंने पाया कि फ़र्श पर उनका ही ख़ून फ़ैला था और वो उसके बीच खड़ी थीं.



दो बम विस्फोट 129,000 और 226,000 लोगों के बीच मारे गए, जिनमें से अधिकांश नागरिक थे,

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