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बस एक हपते का समय है विक्रम लैन्डेर ओर रोवर से संपर्क करने का ।


बस एक हफ्ते और, फिर खत्म हो जाएगा लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान



ISRO के वैज्ञानिक लगातार चंद्रयान 2(Chandrayan-2)के लैंडर विक्रम से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन अब तक उन्हें निराशा ही हाथ लगी है. पिछले एक हफ्ते की तमाम कोशिशों का नतीजा सिफर रहा है. अब ISRO के पास महज़ एक हफ्ते का वक्त है. अगर इतने वक्त में लैंडर विक्रम से संपर्क नहीं हो पाता है, तो ISRO हमेशा-हमेशा के लिए विक्रम को खो देगा। 

लैंडर विक्रम के साथ ही रोवर प्रज्ञान भी है. वो चांद पर महज एक दिन ही बचा रह सकता है. और चांद पर एक दिन का मतलब है,, धरती पर 14 दिन. इन 14 दिनों में से 7 दिन गुजर चुके हैं और अब रोवर के पास महज 7 दिन यानी कि एक हफ्ते और बचे हैं. अगर इन एक हफ्तों में ISRO के वैज्ञानिक रोवर से काम नहीं ले पाते हैं, तो वो बेकार हो जाएगा, किसी काम का नहीं रह जाएगा. ISRO के वैज्ञानिकों के मुताबिक हर बीतते घंटे के साथ ही रोवर प्रज्ञान में लगी बैट्री कम होती जा रही है और कम होती बैट्री संभानवाओं को भी कम करती जा रही है. ISRO वैज्ञानिकों के मुताबिक अगर लैंडर सही दिशा में होता तो अपने सोलर पैनल के जरिए ये रोवर की बैट्री को चार्ज कर देता, लेकिन फिलहाल ऐसा होता दिख नहीं रहा है। 

अभी भी ISRO के वैज्ञानिक लैंडर से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। 
6 सितंबर की देर रात चांद पर लैंडिंग के दौरान लैंडर विक्रम का ISRO से संपर्क टूट गया था. 8 सितंबर को आर्बिटर ने उसकी थर्मल इमेज भेजी थी। लेकिन 8 दिन बीतने के बाद भी ISRO के वैज्ञानिक लैंडर से संपर्क नहीं कर पाए हैं. संपर्क न हो पाने की वजह से लैंडर के साथ गया रोवर प्रज्ञान भी अपना काम नहीं कर पा रहा है. और ISRO के वैज्ञानिक अब भी लैंडर के साथ संपर्क बनाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन फिलहाल वैज्ञानिकों को किसी किस्म की कोई कामयाबी नहीं मिल पाई है। 


इसरो के अध्यक्ष डॉ. कैलासावादिवू सिवन यानी के सिवन. इंडिया टुडे के समूह निदेशक राज चेंगप्पा ने सिवन से बातचीत की. हमारे आपके कई सवालों का जवाब मिला. नरेंद्र मोदी ने क्या कहा? और मिशन चंद्रयान से हमें क्या सीख मिली? ये भी जानने की कोशिश की। 

चांद की सतह पर लैंडर के मिलने के बारे में सिवन ने कहा कि कोई ख़ास महत्त्व नहीं है. सिवन ने कहा,


“हम उससे संपर्क कर पाने में सक्षम नहीं हैं. हमने उसे खोज लिया है, बस इतना ही है.”


सबसे बड़ा सवाल है कि चांद की सतह पर लैंडर कैसे मिला? इस बारे में सिवन ने विस्तार से बताया,

“चांद की सतह पर जहां विक्रम को उतरना था. वहां पहले कोई चीज़ नहीं थी. लेकिन अब है. हमें सिर्फ इतना ही मालूम हुआ है. ये कोई नया गड्ढा नहीं है. हमारा मानना है कि ये विक्रम ही है. इससे ज्यादा हम और कुछ नहीं कह सकते हैं। ”

के सिवन. इसरो के मुखिया. कभी साइकल पर रखकर आम बेचते थे. आज देश के अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान के मुखिया हैं.
के सिवन. इसरो के मुखिया. कभी साइकल पर रखकर आम बेचते थे. आज देश के अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान के मुखिया हैं.
इसरो के चेयरमैन ने कहा है कि विक्रम के साथ संपर्क क्यों टूटा? और असली समस्या क्या थी? इस बार में वे अभी जांच कर रहे हैं. सारे आंकड़ों का विश्लेषण कर रहे हैं. सिवन से पूछा गया कि कब मालूम हुआ कि कुछ गड़बड़ हो गया है? सिवन ने कहा-


“जब हमें पता चला कि हमारा संपर्क टूट गया है.”





इस बारे में सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है सिवन और प्रधानमंत्री मोदी के बीच की मुलाकात को लेकर. वीडियो आया. लेकिन अब भी ये रहस्य है कि मोदी और सिवन के बीच क्या बात हुई? प्रधानमंत्री को सिवन ने क्या बताया? सिवन ने कहा,


“हमने उन्हें सारी बात सही-सही बात बता दी. उन्होंने कहा, चिंता मत करो, निराश मत हो.”



के सिवन ने बताया है कि चंद्रयान 3 मिशन की कितनी संभावना है?
ये तो हो गयी लैंडिंग की रात की बात. अगली सुबह नरेंद्र मोदी फिर से सुबह पहुंचे इसरो के कमांड कंट्रोल. सिवन रोने लगे. मोदी ने गले लगा लिया. इस एहसास के बारे में बात करते हुए सिवन ने कहा,

“मोदी नेशनल लीडर तो हैं ही, हमारे बॉस भी हैं. (अंतरिक्ष विभाग प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन आता है). मैं भी भावुक हो गया था. हम उम्मीदों को पूरा नहीं कर पाए थे. उन्होंने मुझे तुरंत दिलासा दिया. मैंने राहत महसूस की. जब देश का पीएम आपको गले लगा रहा हो तो आपको प्रेरणा मिलती है. इससे मुझे भविष्य में काम करने के लिए मानसिक शक्ति मिली है.”


मिशन की सफलता के बारे में बात करते हुए सिवन ने बताया,



“लैंडर से तो संपर्क नहीं बैठ पा रहा है. और ऑर्बिटर की जीवन एक साल के लिए डिजाइन किया गया था. अब उसका जीवन अब साढ़े सात साल रहेगा.”

यानी ऑर्बिटर अपनी तय मियाद से बहुत ज़्यादा काम करेगा.

के सिवन. ISRO के डायरेक्टर. और वो क्षण जब उन्होंने बताया कि लैंडर से संपर्क टूट गया है.
चंद्रयान-2 तो आंशिक रूप से असफल रहा है. ऐसे में सवाल है. कि क्या चंद्रयान-3 का मिशन होगा? सिवन ने जवाब दिया,

“इसका फैसला डाटा के विश्लेषण से मिले नतीजे के बाद किया जाएगा. हमें पहले पता लगाना है कि वास्तव में क्या गड़बड़ हुई? उसके बाद ही हम भविष्य के बारे में बात कर सकते हैं.”


इसरो चेयरमैन ने कहा,


“नये अभियानों का काम चलता रहेगा. अभी तो हमें बहुत से दूसरे चुनौतीपूर्ण और ज्यादा जटिल काम करने हैं. अतीत में क्या हुआ, इस बात की चिंता छोडनी है. हमारे लिए पहले से तय कामों को पूरा सबसे ज्यादा ज़रूरी है.”


बातचीत के आखिरी पड़ाव में सिवन ने कहा


“अंतरिक्ष में लक्ष्य हासिल होने तक हम यह नहीं कह सकते हैं कि मिशन पूरा हो गया है, चाहे हम नया सिस्टम इस्तेमाल कर रहे हों या पुराना. राकेट साइंस में हमेशा कुछ अनजान रहस्य बने रहते हैं.”

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