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डीएम छुआछूत की शिकायत सुनने आये बसपा नेताओं को देख बोले।

नेताओं से बोले तुम्हारे जूते कितने के हैं। 

पूर्वी उत्तर प्रदेश का जिला बलिया. यहां के लोग जिले के नाम के आगे बागी लगाते हैं. खुद को बलिया का नहीं बागी बलिया का बताते हैं. क्यों, क्योंकि देश आजाद हुआ था 15 अगस्त, 1947 को. लेकिन बलिया पांच साल पहले ही आजादी का जश्न मना चुका था. 15 अगस्त को जब देश आजाद हुआ, तो बलिया ने दूसरी बार आजादी बनाई और अपने नाम के आगे बागी शब्द जोड़ लिया.
बलिया के डीएम ने की बसपा नेताओं पर टिप्पड़ी

छात्रों को अलग थाली देकर अलग बिठाया जाता है।


लेकिन यही बलिया आजादी के  72 साल बाद भी जातिवाद और छूआछूत से आजाद नहीं हो पाया है. हाल ही में बलिया जिले के रामपुर गांव की एक खबर ने सबका ध्यान खींचा था. खबर थी कि वहां के प्राइमरी स्कूल में मिड-डे मील के दौरान बच्चों को जाति देखकर अलग-अलग बिठाया जाता है और उनकी थालियां भी अलग-अलग हैं. 

लेकिन ये खबर तो छुआछूत की बानगी भर थी. इससे बड़ी बात तो तब हो गई, जब इस बात की जांच करने के लिए बलिया के स्थानीय बीएसपी नेता को-ऑर्डिनेटर मदनराम और जिलाध्यक्ष संतोष कुमार रामपुर के प्राइमरी स्कूल में पहुंच गए. जब बलिया डीएम भवानी सिंह को इस बात की खबर लगी, तो वो भी स्कूल में पहुंच गए. और वहां जो हुआ, उसे किसी भी कीमत पर जायज नहीं कहा जा सकता.

डीएम भवानी सिंह बीएसपी नेताओं को देखकर इतने डिस्टर्ब हो गए कि बसपा नेताओं को ताने मारने लगे. उनके कपड़ों पर कमेंट करने लगे. ऐसा नहीं था कि डीएम साहब को पता नहीं था कि उनके शिकायतकर्ता किस वर्ग से होंगे. लेकिन डीएम साहब को दलित वर्ग के नेताओं से इतनी इरिटेशन हुई कि पर्सनल कमेंट करने पर आ गए. डीएम साहब बसपा नेता का हाथ पकड़कर बोले 
’25 लाख की गाड़ी में सफेदपोश आए हैं यहां राजनीति करने. तुम्हारे जूतों की कीमत क्या है? तुम्हारी घड़ी की कीमत क्या है?’

नेताओं और अधिकारीयों में बहस होना सामान्य बात है, लेकिन यहां तो नेता बहस करते हुए भी नहीं दिख रहे. मामले की जांच पर ध्यान देने की बजाय, शिकायत करने वालों के कपड़ों पर तंज कसना ओछी हरकत है. डीएम के इस तरह के व्यवहार के बाद लोग न्याय की उम्मीद कैसे ही कर सकते हैं. जिन बसपा नेताओं के साथ डीएम ने अभद्रता की है, उनमें से ही एक मदन राम का कहना है-

‘जिलाधिकारी की इस बात से मानसिक पीड़ा पहुंची है. क्या भारतीय जनता पार्टी की सरकार में दलित समुदाय के लोगों को अच्छे कपड़े पहनने का अधिकार नहीं है’

पूरा मामला ये है कि दो दिन पहले ही मायावती ने एक ट्वीट करके, मिड डे मील के दौरान होने वाली छूआछूत की इस घटना की निंदा की थी. इसलिए कुछ स्थानीय नेता, मामले की जांच करने रामपुर गांव के प्राइमरी स्कूल पहुंचे थे. मायावती ने दो दिन पहले उस ट्वीट में कहा था। 

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