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छोटी बच्ची की इस तस्वीर को 7 सेकेंड गौर से देखिए, इससे जुड़ी इमोशनल स्टोरी आपका संडे बना देगी

छोटी बच्ची की इस तस्वीर को 7 सेकेंड गौर से देखिए, इससे जुड़ी इमोशनल स्टोरी आपका संडे बना देगी


बच्ची बर्तन लिए इस उम्मीद में बाहर इसलिए खड़ी है ताकि उसे भी थोड़ा बचा हुआ खाना मिल जाए.
हैदराबाद का एक स्कूल. उसमें क्लास चल रही है. टीचर पढ़ा रही है. बच्चे ज़मीन पर बैठे टीचर को सुन रहे हैं. सब यूनिफ़ॉर्म पहनकर बैठे है. क्लास के बाहर एक बच्ची खड़ी है. नीले रंग के पुराने कपड़े पहने हैं. हाथ में एक बर्तन है. बच्ची चुपचाप क्लास के अन्दर झांक रही है. नतीजतन बच्ची को इसी स्कूल में एडमिशन मिल जाता है.




# क्या है पूरी खबर-

अब पूरी ख़बर तफ़सील से समझते हैं. दरअसल ये एक सरकारी स्कूल है. बच्ची बर्तन लिए इस उम्मीद में बाहर खड़ी है ताकि उसे भी थोड़ा बचा हुआ खाना मिल जाए. इस तस्वीर ने सोशल मीडिया पर सबका दिल छू लिया. एक भले इंसान का कुछ ज़्यादा ही. उसने बच्ची का स्कूल में एडमिशन करवाया ताकि उसे भी मिड डे मील मिल सके.

ये तस्वीर एक तेलगु अखबार में छपी थी. उसका टाइटल था ‘आकाली चोपू’. इसका मतलब होता है भूख से त्रस्त होकर एकटक देखना. ये तस्वीर है देवल झाम सिंह गवर्नमेंट हाई स्कूल की. बच्ची का नाम है दिव्या. वो इस स्कूल में नहीं पढ़ती. पर रोज़ स्कूल जाती है. पढ़ने नहीं. इसलिए ताकि मिड दे मील में मिलने वाले खाने में जो बच जाए, उससे वो अपना पेट भर सके । 


दिव्या के माता-पिता स्कूल के पास बनी झुग्गी-झोपड़ी में रहते हैं. कूड़ा उठाने और सफ़ाई का काम करते हैं. जब वो काम पर निकल जाते तो दिव्या बर्तन लेकर स्कूल चली जाती.

# हुआ क्या 

एक एनजीओ है. एमवी फाउंडेशन. यहां वेंकट रेड्डी काम करते हैं. इस एनजीओ का काम बच्चियों के हक़ के लिए लड़ना है. वेंकट ने अखबार का क्लिप सोशल मीडिया पर शेयर किया. साथ ही ये भी लिखा कि कैसे ये बच्ची अपने हक़ की पढ़ाई नहीं कर पा रही. साथ ही वो खाने के लिए भी मोहताज है. जबकि इस देश में हर बच्चे के पास ‘राईट टू एजुकेशन’ है. ये सरकार ने दिया है. पर इसके बावजूद दिव्या जैसे बच्चे क्लास के बाहर खड़े होकर अपने हक़ की चीज़ों को दूर से देखते हैं.


इसके बाद वेंकट रेड्डी ने अपने एनजीओ के बाकी लोगों से संपर्क किया. उन्होंने मिलकर ये सुनिश्चित किया कि दिव्या को इस स्कूल में एडमिशन मिल जाए.

कुछ समय बाद वेंकट ने एक और तस्वीर शेयर की. उसमें दिव्या अपने माता-पिता, स्कूल की बाकी टीचर्स के साथ खड़ी है. क्लासरूम के अंदर यूनिफ़ॉर्म पहनकर.


वेंकट रेड्डी ने एक और पोस्ट शेयर किया. उसमें लिखा कि दिव्या एडमिशन मिलने पर बहुत ख़ुश है. अब उसे पढ़ाई के साथ-साथ खाना भी मिल पाएगा. साथ ही वेंकट दिव्या के घर भी गए. उन्होंने बताया कि उस इलाके में रहने वाले लोग कितनी बत्तर हालत में रह रहे हैं.

अच्छी बात ये है कि एक तस्वीर ने दिव्या की ज़िंदगी बदल दी. काश दिव्या की तरह और बच्चियों को ऐसा मौका मिल सके.

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