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मध्य प्रदेश / रेत पर हथेली फिसलने को मान बैठे- महुआ पेड़ खींचता है, इसमें न विशेष औषधीय गुण, न कोई शक्ति.

मध्य प्रदेश / रेत पर हथेली फिसलने को मान बैठे- महुआ पेड़ खींचता है, इसमें न विशेष औषधीय गुण, न कोई शक्ति


रेतीली जमीन पर पेड़ के पास मौजूद डॉ. आर अभ्यंकर।

 रेतीली जमीन पर पेड़ के पास मौजूद डॉ. आर अभ्यंकर।

पिपरिया के पास एसटीआर क्षेत्र में महुआ पेड़ को छूने से बीमारियां ठीक होने की अफवाह मामले में खुलासा

आदिवासी चिकित्सा पद्धति पर 20 साल से शोध कर रहे डॉ. आर अभ्यंकर की रिपोर्ट में इसे सिर्फ भ्रम बताया गया

होशंगाबाद/भोपाल. आदिवासी चिकित्सा पद्धति पर 20 साल से शोध कर रहे डॉ. आर. अभ्यंकर ने दावा किया कि पिपरिया के पास एसटीआर क्षेत्र में कई बीमारियों के ठीक होने की अफवाह के चलते सुर्खियों में आए महुआ पेड़ में ऐसा कुछ भी नहीं है। वह सामान्य पेड़ों जैसा ही है। यह पेड़ नयागांव-कोड़ापडरई के जंगली क्षेत्र में है, वहां नदी के पास होने से रेत फैली हुई है।


उन्होंने करीब एक घंटे तक पेड़ और उसके आसपास के इलाके को समझा। उस तरह भी देखा जैसा लोग यहां अफवाह के बाद पूजा करने के लिए बैठते हैं। तब यह पता चला कि जब लोग रेत पर पेड़ के पास हथेली रखते हैं तो रेत के कण हथेली के संपर्क में आते ही स्वाभाविक फिसलन होती है। इसलिए लोगों को भ्रम हो रहा है कि कोई शक्ति पेड़ की खींच रही है। 

विज्ञान की नजर से महुआ, सामान्य जंगली पेड़ है


नयागांव कोड़ापड़रई के पास स्थित महुआ पेड़ सामान्य है। इसका वनस्पतिक नाम मधुका लोंगफोलिआ है।
महुआ ऑर्डर इबेनेल्स और सैपोटेसी कुल का पेड़ है। बूढ़ा होने से इसके फल कड़वे लगते हैं।
जमीन पर हाथ रखने से ब्लड कैपिलरी और रेत के कणों बीच फिसलन से भ्रम होता है कि महुआ पेड़ हमें अपनी ओर खींच रहा है। ऐसा कुछ है नहीं।
पेड़ के तने से मिल्की सैप नामक तरल पदार्थ (दूधिया) निकलता है, जो सैपोटेसी कुल के हर पेड़ से निकलता है।

लोगों ने आस्था से जोड़ा, इस वजह से बढ़ा अंधविश्वास


कुछ दिनों से अफवाह चली कि एसटीआर में मौजूद महुआ पेड़ चमत्कारिक है। पेड़ के सामने बैठकर पूजा और तने को दोनों हाथों के बीचों बीच कर लिपटने से हर बीमारी दूर हो रही है।
सोशल मीडिया के साथ कुछ मीडिया नेटवर्क ने भी इसे फैलाया। इसके बाद हजारों लोग पेड़ के पास पहुंचने लगे और पूजा-पाठ की।
प्रशासन ने धार्मिक आस्था मानकर सख्ती नहीं की और केवल व्यवस्था में बनाने लगा रहा, इस कारण बात बढ़ती चली गई।
पेड़ की औषधीय और रासायनिक संरचना


औषधीय गुण से भरपूर होता है: महुआ पेड़ की छाल का प्रयोग त्वचा रोग में किया जाता है। इसमें स्टीराल ग्लूकोसाइड, ल्यूपियाल एसीटेट और बिटुलिनिन पाया जाता है।

आदिवासियों के जीवन में महत्व: केसला ब्लॉक सहित इलाकों में महुआ पेड़ हैं। आदिवासी महुआ के फूलों से कच्ची शराब और बीजों से गुल्ली यानी खाने का तेल बनाते हैं।


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