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CAB के विरोध में पश्चिम बंगाल में पांच ट्रेनें जला दी गईं।

CAB के विरोध में पश्चिम बंगाल में पांच ट्रेनें जला दी गईं।


CAB का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों ने पश्चिम बंगाल में ट्रेनों में तोड़फोड़ की. इसके साथ ही बसों और ट्रेनों में आग लगा दी (फोटो- PTI)
Citizenship Amendment Bill यानी CAB अब कानून बन चुका है. इस कानून का पूर्वोत्तर राज्यों खासकर असम में खासा विरोध हो रहा है. वहीं, पश्चिम बंगाल में भी विरोध ने 14 दिसंबर को हिंसक रूप ले लिया. यहां लोग नेशनल हाइवे जाम करके बैठें, बसों को आग के हवाले कर दिया, वहीं ट्रेनें जला दी गई हैं.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में लालगोला रेलवे स्टेशन पर पांच खाली ट्रेनें जला दी गईं. प्रदर्शन के चलते राज्य के अलग-अलग इलाकों में रेल सेवाएं ठप हो गई हैं. प्रदर्शनकारियों ने हावड़ा के संकरैल रेलवे स्टेशन के आसपास के रास्ते ब्लॉक कर दिये. कुछ दुकानों को आग के हवाले किया. इसके बाद वे स्टेशन परिसर में घुसे और टिकट काउंटर में आग लगा दी.

लेकिन हालात सबसे ज्यादा खराब असम में हैं.


लोकसभा में बिल पास होने के बाद से ही असम में लोग इसके विरोध में प्रोटेस्ट कर रहे हैं. असम से जुड़े ऐसे विजुअल्स सामने आए हैं जो डराने वाले हैं. एक वीडियो में पुलिस वाले लोगों को दौड़ा-दौड़ाकर फायरिंग कर रहे हैं. 12 दिसंबर को फायरिंग में असम के नामगढ़ इलाके में एक लड़के की मौत हो गई. सैम स्टैफोर्ड नाम के इस लड़के की उम्र 18 साल थी.


सैम अपने दोस्तों के साथ प्रदर्शन में शामिल हुआ था. वह घर लौट रहा था, इसी दौरान पुलिस ने गोलियां चलानी शुरू कर दीं. सैम को पहले लोकल अस्पताल में भर्ती कराया गया, बाद में उसे गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज भेजा गया. लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी. 13 दिसंबर को अंतिम संस्कार के दौरान स्थानीय लोगों ने सैम को शहीद बताकर नारे लगाए.

असम के सरकारी कर्मचारियों ने किया काम रोकने का ऐलान


PTI के अनुसार, असम सरकार के कर्मचारियों ने सिटिज़नशिप अमेंडमेंट एक्ट के विरोध में 18 दिसंबर से काम बंद करने का ऐलान किया है. सडोउ असम कर्मचारी परिषद (SAKP) के अध्यक्ष बसब कलिता ने कहा, ‘हम शुरुआत से बिल का विरोध कर रहे थे और तब तक करते रहेंगे जब तक इस कानून को वापस नहीं ले लिया जाता.’

इससे पहले 14 दिसंबर की सुबह असम के गुवाहाटी और मेघालय के शिलॉन्ग में कर्फ्यू में कुछ देर के लिए ढील दी गई थी.

लेकिन विरोध सिर्फ पूर्वोत्तर और बंगाल में नहीं हो रहे हैं


इस कानून का विरोध सिर्फ उत्तरपूर्व में हो रहा हो, ऐसा नहीं है. दिल्ली में ज़ामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों ने प्रोटेस्ट मार्च निकाला. लगभग दो हजार छात्र इस प्रदर्शन में शामिल हुए. पुलिस ने ये प्रोटेस्ट रोकने के लिए आंसू गैस के गोले दागे. तकरीबन 50 छात्रों को हिरासत में लिया गया.


छात्रों के प्रदर्शन को देखते हुए जनपथ मेट्रो स्टेशन के एंट्री और एग्जिट दोनों के गेट बंद रखे गए. दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC)ने ट्वीट किया कि जनपथ स्टेशन पर ट्रेनें नहीं रोकी जाएंगी.


इससे पहले इस कानून के विरोध में IPS अधिकारी अब्दुर रहमान सर्विस से इस्तीफा दे चुके हैं


1997 बैच के आईपीएस अब्दुर रहमान ने 11 दिसंबर को CAB पास होने के विरोध में इस्तीफा दे दिया था. वो महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग में स्पेशल इंस्पेक्टर जनरल के पद पर थे. इस्तीफा देने के बाद उन्होंने ट्विटर पर लिखा था,

‘नागरिकता संशोधन बिल, 2019 संविधान की मूल धारणा के खिलाफ है. मैं इसकी निंदा करता हूं. मैंने फैसला लिया है कि मैं कल से ऑफिस अटेंड नहीं करूंगा. मैं अपनी सेवाएं छोड़ रहा हूं. ये भारत के धार्मिक बहुलवाद के खिलाफ है. मैं न्याय को पसंद करने वाले हर एक इंसान से अपील करता हूं कि वे लोकतांत्रिक तरीके से इसका विरोध करें. ये संविधान की सबसे बुनियादी विशेषता के खिलाफ है.’
इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने इसे हिंदू राष्ट्र थोपने का एजेंडा बताया था. कांग्रेस इस एक्ट के विरोध में ‘भारत बचाओ रैली’ की तैयारी कर रही है. पश्चिम बंगाल, केरल, पंजाब, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ ने इस संशोधित कानून को अपने राज्य में लागू नहीं करने की बात कही है.

सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल यानी CAB 9 दिसंबर को लोकसभा में पास हुआ, 11 दिसंबर को राज्यसभा की मंजूरी मिली और 12 दिसंबर को भारत के राष्ट्रपति का सिग्नेचर होते ही ये कानून की शक्ल ले चुका है. 

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