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कोरोना वायरस (Corona Virus)

कोरोना वायरस (Corona Virus)


चीन में कोरोना वायरस (corona virus) से फ़ैली दहशत कम होने का नाम नहीं ले रही । अभी तक चीन में कोरोना वायरस से मरने वालों का यह आंकड़ा 80 तक पहुंच चुका है। इसके अलावा दो हजार से ज्यादा लोग इसकी चपेट में अभी भी हैं। इन सब के बीच चीन के प्रधानमंत्री ली क्विंग कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित शहर वुहान में पहुंच चुके हैं। कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए चीन ने वुहान सहित अपने पांच शहरों को सील कर दिया है। यहां आने-जाने वाली रेल, वायु और सड़क परिवहन समेत तमाम सेवाओं पर रोक लगा दी गई हैं। उधर, अमेरिका के स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया है कि देश में कोरोनावायरस के पांच मामलों की पुष्टि हो चुकी है। ऐसा माना जा रहा है की ये पाँचों व्यक्ति वुहान गयेथे जहाँ से उन्हें कोरोना वायरस ने संक्रमित किया ।

DNS में आज हम जानेंगे कोरोना वायरस के बारे में साथ ही समझेंगे भारत में इसके प्रभाव के बारे में

कोरोना वायरस (Corona Virus)

भारत में भी कोरोना वायरस के मद्देनज़र काफी एहतियात बरता जा रहा है। देश के सभी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों पर बाहरी देशों से आने वाले यात्रियों और सेवा दलों की जांच की जा रही है । देश के सात हवाई अड्डों पर कोरोना वायरस संक्रमण के संबंध में रविवार तक 137 उड़ानों से आए 29,000 से अधिक यात्रियों की जांच की जा चुकी थी। लेकिन अब तक एक भी मामला सकारात्मक नहीं पाया गया। भारत की सीमा से जुड़े नेपाल में कोरोना वायरस के एक मामले की पुष्टि होने के मद्देनजर भारत ने इस पड़ोसी देश की सीमा से सटे जिलों में सतर्कता बढ़ा दी है। उत्तराखंड में पिथौरागढ़ जिले के झूलाघाट और जौलजीबी में नेपाल के साथ लगती सीमा पर स्वास्थ्य दल तैनात किए गए हैं और आने जाने वाले लोगों की स्वास्थय जांच की जा रही है।

उधर, कोरोना वायरस के द्वारा फ़ैली दहशत को देखते हुए चीन स्थित भारतीय दूतावास को तीसरी हेल्पलाइन जारी करनी पड़ी है। चीन के वुहान शहर जहां सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं वहां छात्रों समेत काफी बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं। भारतीय दूतावास ने बताया कि पिछले दो दिनों में उनके पास लगभग 600 कॉल आ चुकी हैं। चीन में भारतीय दूतावास ने पहले +8618612083629 और +8618612083617 नंबर शुरू किए थे। अब नए हेल्पलाइन नंबर +8618610952903 पर भी कॉल करके मदद मांगी जा सकती है।

कोरोना वायरस के बारे में आपको बताएं तो ये विशेष प्रकार के वायरस में से एक है जिसके सामान्य लक्षणों में सर्दी लगना, सांस से सम्बंधित तकलीफें और आंत से जुडी बीमारियों के पैदा होने का खतरा आते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में जारी अपने बयान में कहा है कि कोरोना वायरस बेहद नजदीकी संपर्क में रहने वाले दो इंसानों में एक से दूसरे में संक्रमित हो सकता है। मानवों पर प्रभाव डालने के अलावा कोरोना वायरस जानवरों जैसे सूअर, बिल्लियों कुत्तों और पक्षियों आदि जैसे जानवरों पर अपना असर दिखा सकते हैं। अभी तक के ज्ञात कोरोना वायरस में सबसे घातक सार्स कोरोना वायरस और मर्स कोरोना वायरस पाए गए हैं जिनसे सांस सम्बन्धी गंभीर बीमारियां पैदा हो सकती हैं।

हाल ही में पहचाने गए कोरोना वायरस का वुहान मे फैली बीमारी से कोई सम्बन्ध तो नहीं बताया जा सका है। लेकिन फिर भी ये कयास लगाए जा रहे है कि ये बीमारी चीन में साल 2002 के बाद फ़ैली सार्स महामारी से जुडी हो सकती है जिसने तकरीबन 350 लोगों की जान ले ली थी। विश्व स्वस्थ्य संगठन के मुताबिक़ इस नए वायरस के फैलने के कारणों और संक्रमण का पता लगाने के लिए अभी और तफ्तीश की ज़रुरत है। कई अलग - अलग कोरोना वायरस लोगों को संक्रमित और बीमार कर सकते हैं। आम तौर पर इसकी वजह से मामूली से औसत ऊपरी-श्वसन रोग होता है। लेकिन, कुछ कोरोना वायरस गंभीर बीमारी उत्पन्न कर सकते हैं।

कोरोना वायरस परिवार में जो संक्रमण के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं उनमे मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोवी वायरस और सार्स कोरोना वायरस अहम् हैं। इसके अलावा MERS - कोवी कोरोवायरस के बारे में आपको बताएं तो ये एक घातक और उभरता हुआ RNA वायरस है। ये एक ऐसी महामारी के लिए ज़िम्मेदार है जो मध्य पूर्व से दुनिया के आठ देशों को प्रभावित करता है। 2012 में फ़ैली एक महामारी ने फ्रांस समेत दुनिया के अन्य देशों को भी अपने कब्ज़े में ले लिया था। इसके अलग सार्स-कोवी कोरोवायरस की खोज एशिया में SARS के प्रकोप के बाद 2003 में हुई थी, जिसके संक्रमण ने इसे पूरे विश्व में एक घातक महामारी का कारण बना दिया।

कोरोना वायरस अपना शिकार ज्यादातर 50 साल से कम उम्र के व्यक्तियों को बनाता है। कोरोना वायरस संक्रमण का पता लगाने के लिए आणविक टेस्ट और सर्जरी टेस्ट का प्रयोग किया जाता है। कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए कोई वैक्सीन नहीं है न ही इसके लिए कोई विशेष उपचार है। साबुन और पानी से अपने हाथ धोकर, अपनी आँख, नाक या मुंह ना छूकर और संक्रमित लोगों के ज्यादा करीब रहने से बचकर संक्रमण के जोखिम को घटाया जा सकता है।
कोरोना वायरस के संक्रमण से डॉक्टरों की लड़ाई कुछ ऐसी है मानों वे किसी अनजाने दुश्मन के ख़िलाफ़ लड़ रहे हों.

ये आपके शरीर पर किस तरह से हमला करता है? संक्रमण के बाद इंसान के शरीर में किस तरह के लक्षण देखने को मिलते हैं?

किन लोगों के गंभीर रूप से बीमार पड़ने या मौत की आशंका अधिक रहती है? और आप इसका कैसे इलाज करेंगे?

चीन के वुहान शहर के जिन्यिन्तान हॉस्पिटल में इस महामारी का इलाज कर रहे डॉक्टरों की टीम ने अब इन सवालों का जवाब देना शुरू कर दिया है.

कोरोना वायरस से संक्रमित होने वाले पहले 99 मरीज़ों के इलाज का विस्तृत ब्योरा लांसेट मेडिकल जर्नल में पब्लिश किया गया है.

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कोरोनावायरस का क़हर, 100 से ज़्यादा की मौतफेफड़े पर हमला

वुहान के जिन्यिन्तान हॉस्पिटल में जिन 99 मरीज़ों को लाया गया था, उनमें निमोनिया के लक्षण थे.

इन मरीज़ों के फेफड़े में तकलीफ़ थी और फेफड़े की वो जगह, जहां से ऑक्सिजन रक्त में प्रवाह जाता है वहां पानी भर हुआ था.

दूसरे लक्षण थे...
82 लोगों को बुखार था.

81 को खांसी थी.

31 लोग सांस की तकलीफ़ से जूझ रहे थे.

11 को मांसपेशियों में दर्द था.

9 को भ्रम हो रहा था.

8 को सर दर्द.

5 लोगों के गले में फोड़े की समस्या थी.


चीन में कोरोनावायरस के केंद्र वुहान से अमरीकी, जापानी और यूरोपीय नागरिक लौट रहे हैं घर
मौत के शुरुआती मामले
कोरोना वायरस से संक्रमित जिन दो मरीज़ों की मौत पहले हुई, वे स्वस्थ दिख रहे थे.

उन्हें लंबे समय से सिगरेट की लत थी और ऐसा हो सकता है कि इस वजह से उनके फेफड़े कमज़ोर पड़ गए हों.

61 साल के जिस शख़्स को अस्पताल लाया गया था, वो बुरी तरह से निमोनिया के लक्षणों से पीड़ित था.

उसे सांस लेने में बहुत तकलीफ़ हो रही थी. आप इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि उस व्यक्ति का फेफड़े शरीर को ज़िंदा रखने के लिए ज़रूरी ऑक्सिजन की सप्लाई नहीं कर पा रहा था.

वेंटिलेटर पर रखे जाने के बावजूद, उस व्यक्ति का फेफड़ा नाकाम हो गया और उसके दिल ने काम करना बंद कर दिया.

दूसरा मरीज़ 69 साल का था और उसे भी सांस लेने की तकलीफ़ थी. उसे कृत्रिम रूप से ऑक्सिजन देने की कोशिश की गई लेकिन वो नाकाफ़ी रहा.

निमोनिया ने तब उसकी जान ले ली जब उसका ब्लड प्रेशर गिर गया था.


चीन से निकलकर कोरोना वायरस पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा रहा है.
कम से कम दस लोगों की मौत
25 जनवरी तक 99 लोगों की मौत कोरोना वायरस से हुई थी. उस तारीख़ तक 57 लोग अस्पताल में थे. 31 को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी.

11 लोगों की मौत हो गई. इसका ये मतलब नहीं हुआ कि कोरोना वायरस से मरने वाले लोगों का प्रतिशत 11 हुआ.

भले ही इस बात की आशंका बनी हुई है कि अस्पताल में भर्ती लोग मौत से ये लड़ाई हार जाएं और मुमकिन है कि मामूली लक्षणों से जूझ रहे लोग अस्पताल नहीं पहुंच पाए हों.

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मार्केट स्टाफ़
वुहान के हुआनान सीफूड मार्केट में मिलने वाले समुद्री जीव को कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह माना जा रहा है.

वुहान के जिन्यिन्तान हॉस्पिटल में लाए गए 99 लोगों में 49 का इस सीफूड मार्केट से जुड़ाव था.

47 लोग हुआनान सीफूड मार्केट में या तो मैनेजर के तौर पर काम कर रहे थे या फिर वहां दुकान चला रहे थे. संक्रमित होने वाले लोगों में केवल दो ही ऐसे थे जो दरअसल, ख़रीददार थे.

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प्रभावित लोगों में अधेड़ ज़्यादा
99 मरीज़ों में ज़्यादातर अधेड़ उम्र के थे. उनमें 67 पुरुष थे और मरीज़ों की औसत उम्र 56 साल थी.

हालांकि ताज़ा आंकड़ों से ये संकेत मिलता है कि कोरोना वायरस से संक्रमित स्त्री पुरुषों के बीच ज़्यादा फ़र्क़ नहीं है.

चीन के सेंटर फ़ॉर डिजीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन का कहना है कि छह पुरुषों की तुलना में पाँच महिलाओं में इसका संक्रमण पाया गया है.

इस अंतर की व्याख्या की जा सकती है. माना जा रहा है कि पुरुष कोरोना संक्रमण की वजह से गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं और अस्पताल में भर्ती कराए जाने की ज़रूरत पड़ सकती है.

सामाजिक और सांस्कृतिक वजहों से वायरस के संक्रमण की जद में आने का ख़तरा पुरुषों के साथ ज़्यादा रहता है.

जिन्यिन्तान हॉस्पिटल के डॉक्टर ली झांग कहते हैं, "कोरोना वायरस के संक्रमण की आशंका महिलाओं में कम है क्योंकि उनमें एक्स क्रोमोज़ोम और सेक्स हार्मोन की वजह से ज़्यादा प्रतिरोधक क्षमता रहती है."

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जो लोग पहले से बीमार थे
99 मरीज़ों में ज़्यादातर लोगों को पहले से कोई न कोई बीमारी थी. इस वजह से कोरोना से संक्रमित होने का ख़तरा उनमें ज़्यादा था.

डॉक्टर इसे कमज़ोर प्रतिरोधक क्षमता का नतीजा बता रहे हैं.

40 मरीज़ों को दिल कमज़ोर था या फिर रक्त वाहिनी में समस्या था. उन्हें हृदय रोग था, पहले दिल के दौरे पड़ चुके थे.

बीजिंग/ वुहान। चीन में कोरोना वायरस (Corona virus) के केंद्र वुहान में रिकार्ड 9 दिन में बनकर तैयार 1000 बिस्तरों वाला अस्पताल सोमवार को चालू हो गया और इस जानलेवा विषाणु का उपचार करने के लिए एक दवा का क्लीनिक परीक्षण भी शुरू कर दिया गया। चीन में कोरोना वायरस के चलते 361 लोगों की जान जा चुकी है और 17238 लोग इसकी चपेट में आ गए हैं।

मशहूर चीनी स्वास्थ्य विशेषज्ञ झोंग नानशान ने कहा कि नए सबूतों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि तेजी से चीन और दुनिया में फैल रहा कोरोना वायरस अगले 10 से 14 दिनों में अपने शिखर पर पहुंच सकता है जबकि पहले कहा गया था कि उससे पहले ही वह चरम पर पहुंच जाएगा। विशेषज्ञ ने कहा कि इसका मतलब है कि अगले 2 सप्ताह में इस विषाणु के मामले बहुत तेजी से बढ़ेंगे और फिर उसकी रफ्तार घट जाएगी।

चीन के स्वास्थ्य अधिकारियों ने सोमवार को घोषणा की कि चीन में रविवार को 57 लोगों की जान चले जाने के साथ ही कोरोना वायरस से अब तक 361 लोगों की मौत हो चुकी है और उसके सत्यापित मामले 17,238 तक पहुंच गए हैं। रविवार को इस बीमारी के चलते जिन 57 लोगों की मौत हुई, उनमें 56 मरीज कोरोना वायरस के केंद्र हुबेई प्रांत के थे और एक दक्षिण पश्चिम चोंगकिंग प्रांत से था।

अन्य देशों में फिलीपिंस में एक व्यक्ति की इस बीमारी से मौत हुई है। दुनियाभर में इस रोग के 148 मामले सामने आ चुके हैं। भारत में कोरोना वायरस के 3 मामले सामने आए हैं और तीनों ही मरीज केरल के हैं जो वुहान से लौटे हैं।

चीन में विशेषकर कोरोना वायरस के मरीजों के इलाज के लिए रिकॉर्ड 9 दिन में तैयार किया गया 1000 बिस्तरों का अस्थाई अस्पताल सोमवार को शुरू हो गया। बुधवार से उसके बगल में ही 1300 बिस्तरों वाला एक अन्य अस्थाई अस्पताल काम करना शुरू कर देगा। साथ मिलकर वे कोरोना वायरस के उपचार के लिए 2300 बिस्तरों वाले अस्पताल बन जाएंगे।


सरकारी मीडिया के अनुसार नए अस्पताल से शहर में अस्पतालों में सामने आ रही बिस्तरों की कमी की समस्या हल होगी। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के चिकित्सा कर्मी नए हुओशेनशान अस्पताल की कमान अपने हाथों में ले लेंगे।

सरकारी मीडिया में बिल्कुल ही जल्दबाजी में किए जा रहे अस्पतालों के निर्माण को सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना की ऐसी महामारी से निपटने की क्षमता की एक बड़ी ताकत के रूप में प्रकाशित किया गया है। चीन ने कोरोना वायरस के मरीजों का उपचार करने के लिए एक दवा का क्लीनिकल परीक्षण भी शुरू कर दिया है।

बताया जाता है कि फिलहाल इस बीमारी का उपचार नहीं है। फिलहाल मरीजों को एंटीवायरल दिया जा रहा है और अन्य उपायों की मदद ली जा रही है। वैज्ञानिक टीके की खोज की जद्दोजेहद में लगे हैं। कुछ खबरों के अनुसार एचआईवी के इलाज में काम आने वाली दवाओं को भी इस वायरस के मरीजों के उपचार पर परखा जा रहा है।

साउथ चाइना मोर्निंग पोस्ट ने खबर दी कि क्षेत्रीय परीक्षण में परखी जाने वाली एंटीवायरल दवा रेमडेजिविर को अमेरिका की दवा कंपनी गिलिएड साइंसेंज ने तैयार किया है और वह इबोला एवं सार्स जैसी बीमारियों के उपचार के लिए है। चीन के नेशनल हेल्थ कमीशन ने सोमवार को कहा कि वुहान के विभिन्न अस्पतालों में दवा को परखा जा रहा है।


चाइनीज एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के विद्वान झोंग नानशान ने कहा कि वर्तमान शोध से पता चला हे कि यह विषाणु चमगादड़ से आता है लेकिन उसके मानव तक पहुंचने में कोई और जीव हैं या नहीं, यह जांच का विषय है।

उन्होंने सरकारी संवाद समिति शिन्हुआ से कहा कि वैसे तो अब तक कोई प्रभावी उपचार नहीं है लेकिन इस विषाणु की आनुवांशिक सामग्री को निशाना बनाने वाली कम से कम 7 दवाएं क्लीनिकल परीक्षण के विभिन्न दौर से गुजर रही हैं।

इस बीच चीन ने सोमवार को अमेरिका पर कोरोना वायरस को लेकर ‘दहशत’ फैलाने और चीनी यात्रियों पर रोक लगाने का आरोप लगाया। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि उसने इस विषाणु के बारे में गलत सूचनाएं फैलने से रोकने के लिए गूगल के साथ हाथ मिलाया है।

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