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All time best sad Shayari Hindi status

 Sad Shayari status


खत्म हो गई कहानी बस कुछ अल्फाज़ बाकी हैं,

एक अधूरे इश्क की एक मुकम्मल सी याद बाकी है।




हमने कब कहा कि कीमत समझो तुम हमारी,

गर हमें बिकना ही होता तो आज यूँ तनहा न होते।



ये सिलसिला उल्फत का चलता ही रह गया,

दिल चाह में दिलबर के मचलता ही रह गया,

कुछ देर को जल के शमां खामोश हो गई,

परवाना मगर सदियों तक जलता ही रह गया।


मोहब्बत मांगी थी मोहब्बत के बदले,

तुम वो भी हमको दे न सके,

दिल को चाह जब कहीं बहलाना,

इस बात को भी तुम सह न सके,

हम किसी को अपना बनाएं यहाँ,

शायद ये किस्मत को मंज़ूर नहीं था,

आपका इस कदर हमसे रूठना,

मोहब्बत का दस्तूर तो नहीं था।




आप होते जो मेरे साथ तो अच्छा होता,

बात बन जाती अगर बात तो अच्छा होता,

सबने माँगा है मुझसे मुहब्बत का जवाब,

आप करते जो सवालात तो अच्छा होता।

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Shayari

जाने क्या मुझसे ज़माना चाहता है,

मेरा दिल तोड़कर मुझे हँसाना चाहता है,

जाने क्या बात है मेरे इस चेहरे से,

हर शख्स मुझे आज़माना चाहता है।


 

Sad Shayari


तेरी ज़ुबान ने कुछ कहा तो नहीं था,

फिर ना जाने क्यों मेरी आँख नम हो गयी।



नाम उसका ज़ुबान पर आते आते रुक जाता है,

जब कोई मुझसे मेरी आखिरी ख्वाहिश पूछता है।


 

जब भी उनकी गली से गुज़रते हैं,

मेरी आँखें एक दस्तक दे देती हैं,

दुःख ये नहीं वो दरवाजा बंद कर देते हैं,

ख़ुशी ये है कि वो मुझे पहचान लेते हैं।



ना तो तुम बुरे सनम, ना ही हम बुरे हैं,

कुछ किस्मत बुरी है और कुछ वक्त बुरा है।


लोग कहते हैं वक्त किसी का गुलाम नही होता,

फिर क्यूँ थम सा जाता है ग़मों के दौर में?



 छूटा जो तेरा हाथ तो हम टूट के रोये,

तुम जो ना रहे साथ तो हम टूट के रोये,

चाहत की तमन्ना थी और ज़ख़्म दिए तुमने,

पायी जो यह सौगात तो हम टूट के रोये।

sad shayari status pic


 

एक बार देख तो लेते आँखों की उदासियाँ,

मेरी मुस्कराहट से तुम क्यूँ फरेब खा गए।


जो हो सके तो चले आओ आज मेरी तरफ़,

मिले भी देर हो गई और जी भी उदास है।



दुनिया में कहाँ वफा का सिला देते हैं लोग,

अब तो मोहब्बत की सजा देते हैं लोग,

पहले सजाते हैं दिलो में चाहतों का ख्वाब,

फिर ऐतबार को आग लगा देते हैं लोग।



अब तो ख़ुशी का ग़म है न ग़म की ख़ुशी मुझे,

बे-हिस बना चुकी है बहुत ज़िंदगी मुझे,

वो वक़्त भी ख़ुदा न दिखाए कभी मुझे,

कि उन की नदामतों पे हो शर्मिंदगी मुझे।



किसी की राह में आँखें

बिछा कर कुछ नहीं मिलता,

ये दुनिया बेवफा है दिल

लगा कर कुछ नहीं मिलता,

कोई भी लौट कर आता नहीं

आँसू बहाने से,

किसी की याद में दिल को

रुलाकर कुछ नहीं मिलता।



जिंदगी के किसी मोड़ पर

अगर तुम लौट भी आये तो क्या है,

वो लम्हात, वो जज्बात,

वो अंदाज तो ना अब लौटेंगे कभी।

और...

शायद मेरी तुम्हारे लिए तड़प भी।


किसी की याद को दिल में बसा के रोये हैं,

किसी की तस्बीर को सीने से लगा के रोये हैं।


जो वादा किया था हम ने किसी के साथ,

उस वादे को दिल से निभा के रोये हैं।


तोहमतें तो लगती रहीं

रोज़ नई नई हम पर,

मगर जो सबसे हसीन इल्जाम था

वो तेरा नाम था।



मोहब्बत की सजा बेमिसाल दी उसने,

उदास रहने की आदत सी डाल दी उसने,

मैंने जब अपना बनाना चाहा उसको,

बातों बातों में बात टाल दी उसने।


ज़िद मत किया करो मेरी दास्तान सुनने की,

मैं हँस कर भी कहूँगा तो तुम रोने लगोगे।


राह-ए-वफ़ा में हम को ख़ुशी की तलाश थी,

दो कदम ही चले थे कि हर कदम पे रो पड़े।


 

मिल गया था जो मुकद्दर वो खो के निकला हूँ,

मैं एक लम्हा हूँ बस रो रो के निकला हूँ,

राह-ए-दुनिया में मुझे कोई भी दुश्वारी नहीं,

मैं तेरी ज़ुल्फ़ के पेंचों से हो के निकला हूँ।


ता हम को शिकायत की भी बाक़ी न रहे जा,

सुन लेते हैं गो ज़िक्र हमारा नहीं करते।

ग़ालिब तेरा अहवाल सुना देंगे हम उनको,

वो सुन के बुला लें ये इजारा नहीं करते।



इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना,

दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना।


सिसकियाँ लेता है वजूद मेरा गालिब,

नोंच नोंच कर खा गई तेरी याद मुझे।


माना कि गलत हम ही थे जो तुमसे मोहब्बत कर बैठे,

पर रोयोगे तुम भी बहुत ऐसी वफ़ा की तलाश में।



वो साथ थी तो मानो जन्नत थी जिंदगी दोस्तों,

अब तो हर सांस जिंदा रहने कि वजह पूछती है।


वो जिसका तीर चुपके से जिगर के पार होता है,

वो कोई गैर होता नहीं अपना रिश्तेदार होता है,

किसी से अपने दिल बात तू कहना न भूले से,

यहाँ ख़त भी ज़रा सी देर में अखबार होता है।


आँसू आ जाते हैं रोने से पहले,

ख्वाब टूट जाते हैं सोने से पहले,

लोग कहते हैं मोहब्बत गुनाह है,

काश...

कोई रोक लेता इसे होने से पहले।


 

मुझे यकीन है मोहब्बत उसी को कहते हैं,

कि जख्म ताज़ा रहे और निशान चला जाये।


मौहब्बत की मिसाल में, बस इतना ही कहूँगा।

बेमिसाल सज़ा है, किसी बेगुनाह के लिए।


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तजुर्बा कहता है,

मोहब्बत से किनारा कर लूँ,

और दिल कहता है,

ये तज़ुर्बा दोबारा कर लूँ।

इस इश्क की परवाह में,

हम तन्हा हो गये,

सही कहते थे लोग,

मोहब्बत तनहा कर जाती है।



सारी दूनिया के रूठ जाने से

मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता,

बस एक तेरा खामोश रहना

बहुत तकलीफ देता है।



तुम्हें ग़ैरों से कब फुर्सत

हम अपने ग़म से कब ख़ाली,

चलो बस हो चुका मिलना

न तुम ख़ाली न हम ख़ाली।



न चाहत न मोहब्बत न इश्क़ और न वफ़ा,

कुछ भी तो नहीं था उस के पास इक हुस्न के सिवा।



तेरे हुस्न पे तारीफों भरी किताब लिख देता,

काश... तेरी वफ़ा तेरे हुस्न के बराबर होती।


 

प्यास इतनी है मेरी रूह की गहराई में,

अश्क गिरता है तो दामन को जला देता है।


यहीं पर सारे चमन की बहार थी कल तक,

पड़ी है आज जहाँ ख़ाक आशियाने की।


उम्र भर खाली यूँ ही

दिल का मकाँ रहने दिया,

तुम गए तो दूसरे को

फ़िर न यहाँ रहने दिया,

उम्र भर उसने भी मुझ से

मेरा ग़म पूछा नहीं,

मैंने भी ख्वाहिशों को

अपनी बेज़बाँ रहने दिया।


 

दिल से मिले दिल तो सजा देते हैं लोग​,

​प्यार के जज्बातों को डुबा देते हैं लोग,

​दो इँसानो को मिलते कैसे देख सकते हैं,

साथ बैठे दो परिन्दो को उड़ा देते हैं लोग।



 

मेरी लड़खड़ाहट तुम, मुझ तक ही रहने दो,

जो बात होश की कर दी, तो बेहोश हो जाओगे।


मैं क़ाबिल-ए-नफ़रत हूँ तो छोड़ दो मुझको,

यूं मुझसे दिखावे की मोहब्बत ना किया करो।



हमें भी याद रखें

जब लिखें तारीख गुलशन की,

कि हमने भी लुटाया है

चमन में आशियां अपना।


ज़िन्दगी से मेरी आदत नहीं मिलती,

मुझे जीने की सूरत नहीं मिलती,

कोई मेरा भी कभी हमसफ़र होता,

मुझे ही क्यूँ मुहब्बत नहीं मिलती।



जीना तो पड़ेगा फ़क़त दुनियाँ को दिखाने के लिये,

वरना मैनें कब चाही थी उसके बगैर जिदंगी।




मुमकिन है कि सदियों भी नजर आए न सूरज,

इस बार अंधेरा मेरे अंदर से उठा है।


कुछ लोग पसंद करने लगे हैं अल्फाज मेरे,

मतलब मोहब्बत में बरबाद और भी हुए हैं।


तेरी हालत से लगता है तेरा अपना था कोई,

इतनी सादगी से बरबाद कोई गैर नहीं करता।



उसको चाहा तो

मोहब्बत की तकलीफ नजर आई,

वरना इस मोहब्बत की

बस तारीफ़ सुना करते थे।


बिछड़ा इस कदर से के रुत ही बदल गयी,

एक शख्स सारे शहर को वीरान कर कर गया।


कुछ इस अदा से तोड़े है ताल्लुक उसने,

एक मुद्दत से ढूंढ़ रहा हूँ कसूर अपना।

 


कितना इख़्तियार था उसे अपनी चाहत पर,

जब चाहा याद किया जब चाहा भुला दिया,

जानता है वो मुझे बहलाने के तरीके,

जब चाहा हँसा दिया जब चाहा रुला दिया।



वफ़ा मैंने नहीं छोड़ी मुझे इलज़ाम मत देना,

मेरा सबूत मेरे अश्क हैं मेरा गवाह मेरा दर्द है।


बस यही सोचकर कोई सफाई नहीं दी हमने।

कि इलज़ाम झूठे ही सही पर लगाये तो तुमने हैं।




जाने क्या कमी है हम में या खुदा,

जाने क्यूँ सब हम से खफा रहते हैं,

हमने तो चाहा बनाना सब को अपना,

जाने क्यूँ सब हमसे जुदा रहते हैं।


क्या बताऊँ कैसे खुद को दर-ब-दर मैंने किया,

उम्र भर किस किस के हिस्से का सफ़र मैंने किया,

तू तो नफरत भी न कर पायेगा इस शिद्दत के साथ,

जिस बला का प्यार बेखबर तुझसे मैंने किया।



तवारीखों में कुछ ऐसे भी मंजर हमने देखे है,

कि लम्हों ने खता की थी और सदियों ने सजा पाई।


टूटे हुये सपनो और रूठे हुये अपनों ने उदास कर दिया,

वरना लोग हमसे मुस्कराने का राज पूछा करते थे।



नज़र अंदाज़ करने की वज़ह क्या है बता भी दो,

मैं वही हूँ जिसे तुम दुनिया से बेहतर बताती थी।



आस पास तेरा एहसास अब भी लिये बैठें हैं,

तू ही नज़र अंदाज़ करे तो शिकवा किससे करें।

 



अपनी तस्वीर को आँखों से लगाता क्या है,

एक नज़र मेरी तरफ देख तेरा जाता क्या है,

मेरी बर्बादी में तू भी है बराबर का शामिल,

मेरे किस्से तू गैरों को सुनाता क्या है।



कुछ यादगार-ए-शहर-ए-सितमगर ही ले चलें,

आये हैं तो फिर गली में से पत्थर ही ले चलें,

रंज-ए-सफ़र की कोई निशानी तो पास हो,

थोड़ी सी ख़ाक-ए-कूचा-ए-दिलबर ही ले चलें।


ज़ख्म सब भर गए बस एक चुभन बाकी है,

हाथ में तेरे भी पत्थर था हजारों की तरह,

पास रहकर भी कभी एक नहीं हो सकते,

कितने मजबूर हैं दरिया के किनारों की तरह।

 

अपना तो आशिकी का किस्सा-ए-मुख्तसर है,

हम जा मिले खुदा से दिलबर बदल-बदल कर।



जीना भी आ गया, मुझे मरना भी आ गया,

पहचानने लगा हूँ, तुम्हारी नजर को मैं।



बहुत खामोशी से गुजरी जा रही है जिन्दगी,

ना खुशियों की रौनक ना गमों का कोई शोर,

आहिस्ता ही सही पर कट जायेगा ये सफ़र,

ना आयेगा दिल में उसके सिवा कोई और।




वो अँधेरा ही सही था कि कदम राह पर थे,

रोशनी ले आई मुझे मंजिल से बहुत दूर।


​मैं पा नहीं सका इस कशमकश से छुटकारा​,

तू मुझे जीत भी सकता था मगर ​हारा क्यूँ​।

तू मेरी बरबादियों के जश्न में शामिल रहा,

ये तसव्वुर ही बहुत आराम देता है मुझे।


भूल जा अब तू मुझे आसान है तेरे लिए,

भूलना तुझको नहीं आसां मगर मेरे लिए।

 


अब तुम को भूल जाने की कोशिश करेंगे हम

तुम से भी हो सके तो न आना ख़याल में।


नजर बचा कर गुजर जाएँ वो मुझसे लेकिन,

मेरे ख्याल से दामन वो बचा नहीं सकते।


जिसे खुद से ही नहीं फुरसतें,

जिसे खयाल अपने कमाल का,

उसे क्या खबर मेरे शौक़ की,

उसे क्या पता मेरे हाल का।

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