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Special Vishnu Saxena Heart touching best pyar Shayari

Special Vishnu Saxena Heart touching  Love Shayari 

Special Vishnu Saxena Heart touching  Love Shayari


 ढलती उम्र मोहब्बत मांगें नयी जवानी से,

हसीनों बचना इनकी कारस्तानी से,

बाढ़ से ज़्यादा खतरा होता है उतरते पानी से...💔

Special Vishnu Saxena Heart touching  Love Shayari


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हम जितने लड़खड़ाए उतने संभाल गए 

पहले तो खंडहर थे अब बन महल गए 

ईमान  बदलते हैं मौसम भी बदलते हैं 

तुम क्यों नहीं बदलते जब हम बदल गए । 


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तू हवा है तो कर ले अपने हवाले मुझको

इससे पहले कि कोई और बहा ले मुझको

आईना बन के गुज़ारी है ज़िंदगी मैंने

टूट जाऊंगा बिखरने से बचा ले मुझको


जब भी कहते हो आप हमसे कि अब चलते हैं

हमारी आंख से आंसू नहीं संभलते हैं

अब न कहना कि संग दिल कभी नहीं रोते

जितने दरिया हैं पहाड़ों से ही निकलते हैं


प्यास बुझ जाए तो शबनम ख़रीद सकता हूं

ज़ख़्म मिल जाएं तो मरहम ख़रीद सकता हूं

ये मानता हूं मैं दौलत नहीं कमा पाया

मगर तुम्हारा हर एक ग़म ख़रीद सकता हूं


सोचता था कि मैं तुम गिर के संभल जाओगे

रौशनी बन के अंधेरों को  निगल जाओगे

न तो मौसम थे न हालात न तारीख़ न दिन

किसे पता थी कि तुम ऐसे बदल जाओगे 

Special Vishnu Saxena Heart touching  Love Shayari


तू जो ख़्वाबों में भी आ जाए तो मेला कर दे 

ग़म के मरुथल में भी बरसात का रेला कर दे 

याद वो है ही नहीं आए जो तन्हाई में 

तेरी याद आए तो मेले में अकेला कर दे 


जो आज कर गयी घायल वो हवा कौन सी है

जो दर्दे दिल करे सही वो दवा कौन सी है

तुमने इस दिल को गिरफ़्तार आज कर तो लिया

अब ज़रा ये तो बता दो दफ़ा कौन सी है


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थाल पूजा का लेकर चले आइये , मन्दिरों की बनावट सा घर है मेरा।

आरती बन के गूँजो दिशाओं में तुम और पावन सा कर दो शहर ये मेरा।


दिल की धडकन के स्वर जब तुम्हारे हुये

बाँसुरी को चुराने से क्या फायदा,

बिन बुलाये ही हम पास बैठे यहाँ

फिर ये पायल बजाने से क्या फायदा,

डगमगाते डगों से न नापो डगर , देखिये बहुत नाज़ुक जिगर है मेरा।


झील सा मेरा मन एक हलचल भरी

नाव जीवन की इसमें बहा दीजिये,

घर के गमलों में जो नागफनियां लगीं

फेंकिये रात रानी लगा लीजिये,

जुगनुओ तुम दिखा दो मुझे रास्ता, रात काली है लम्बा सफर है मेरा।


जो भी कहना है कह दीजिये बे हिचक

उँगलियों से न यूँ उँगलियाँ मोडिये,

तुम हो कोमल सुकोमल तुम्हारा हृदय

पत्थरों को न यूँ कांच से तोडिये,

कल थे हम तुम जो अब हमसफर बन गये, आइये आइये घर इधर है मेरा।


~ डा. विष्णु सक्सेना


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Special Vishnu Saxena Heart touching  Love Shayari



जब बसाने का मन में ना हो हौसला, बेवजह घोसला मत बनाया करो.

और जो उठा न सको तुम गिरे फूल को, इस तरह डालियाँ मत हिलाया करो


वो समंदर नहीं था, थे आंसू मेरे जिनमे तुम तैरते और नहाते रहे

एक हम थे की आंसू की इस झील में बस किनारे पे डुबकी लगाते रहे

मछलियां सब झुलस जाएँगी झील की, अपना पूरा बदन मत डुबाया करो


वो हमें क्या संभालेंगे इस भीड़ में, जिनसे अपना दुपट्टा संभालता नहीं

कैसे मन को मैं कह दूँ सुकोमल है ये, फूल को देखकर जो मचलता नहीं

जिनके दीवारों-दर हैं बने मोम के, उनके घर में न दीपक जलाया करो


प्रेम को ढाई अक्षर का कैसे कहें, प्रेम सागर से गहरा है नभ से बड़ा

प्रेम होता है दिखता नहीं है मगर, प्रेम की ही धुरी पर ये जग है खड़ा

प्रेम के इस नगर में जो अनजान हो, उसको रस्ते गलत मत बताया करो


By- DR. Vishnu Saxena

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रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा, एक आई लहर कुछ बचेगा नहीं।


तुमने पत्थर सा दिल हमको कह तो दिया पत्थरों पर लिखोगे मिटेगा नहीं।


मैं तो पतझर था फिर क्यूँ निमंत्रण दिया


ऋतु बसंती को तन पर लपेटे हुये,


आस मन में लिये प्यास तन में लिये


कब शरद आयी पल्लू समेटे हुये,


तुमने फेरीं निगाहें अँधेरा हुआ, ऐसा लगता है सूरज उगेगा नहीं।


मैं तो होली मना लूँगा सच मानिये


तुम दिवाली बनोगी ये आभास दो,


मैं तुम्हें सौंप दूँगा तुम्हारी धरा


तुम मुझे मेरे पँखों को आकाश दो,


उँगलियों पर दुपट्टा लपेटो न तुम, यूँ करोगे तो दिल चुप रहेगा नहीं।

Special Vishnu Saxena Heart touching  Love Shayari


आँख खोली तो तुम रुक्मिणी सी लगी


बन्द की आँख तो राधिका तुम लगीं,


जब भी सोचा तुम्हें शांत एकांत में


मीरा बाई सी एक साधिका तुम लगी,


कृष्ण की बाँसुरी पर भरोसा रखो, मन कहीं भी रहे पर डिगेगा नहीं।


सपनों में अपनों के हाथ दे गया

मेरी रातों की नींद ले गया हाय.. मेरी रातों की...

डाकिया डाक दे गया....

मेरी रातों की नींद ले गया ....

पाती में प्रीतम ने प्यारी पुकार कर

पूँछी है कुशलक्षेम बीती बिसारकर

मन की मयूरी ने तन के पपीहे को

छेड़ दिया है आज सभी सपने सवाँर कर

करवाचौथ हरियाली,तीज दे गया

मेरी रातों की नींद....

डाकिया डाक दे....

बरगद के तले झूला झूले वो याद है

तन मन की सुध भूले हमको वो याद है

रिमझिम फुहारन में खिलती बहारन में

मै तो थी दुल्हन और तुम तो थे दुल्हा यह याद है

अंकुर उगाने को बीज दे गया

मेरी रातों की नींद ले गया .....

डाकिया डाक.....

छुपके से द्वारे की साँकरिया खोलके

आ बैठे अँगना में हियरा टटोल के

खुद ही झपक गई नयनन की खिड़कियाँ

अरे अधरन के बीच धरी मिसरी सी घोल के

मर्यादित दहलीज दे गया

मेरी रातों की नींद ले गया हाय...

डाकिया डाक दे गया.....



विष्णु जी


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