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Best sher o shayari hindi me All-time favorite

All-time favorite evergreen shero Shayari 


कपडे और चेहरे अक्सर झूट बोला करते हैं

इंसान की असलियत तो वक़्त बताता है,


जरूरी नही कुछ तोडने के लिये पथ्थर ही मारा जाए ।

लहजा बदल के बोलने से भी बहोत कुछ टूट जाता है ।।


All-time favorite evergreen shero Shayari


मुझे मजबूर करती हैं यादें तेरी वरना

शायरी करना अब मुझे अच्छा नहीं लगता


ढल रही हैं ज़िन्दगी बुझ गई शमा परवाने की

अब वजह जीने की नहीं मिलती यहाँ

ज़नाब आपको अब भी पड़ी हैं मुस्कराने की



शायरों की बस्ती में कदम रखा तो जाना

गमों की महफिल भी कमाल की जमती है



अकेले हम बूँद हैं,

मिल जाएं तो सागर हैं

अकेले हम धागा हैं,

मिल जाएं तो चादर हैं

अकेले हम कागज हैं,

मिल जाए तो किताब हैं



पुछ कर देख अपने दिल से की हमे भुलना चहाता है क्या

अगर उसने हा कहा तो कसम से महोब्बत करना छोङ देगे



आज कुछ और नहीं बस इतना सुनो

मौसम हसीन है लेकिन तुम जैसा नहीं



गलतफहमी की गुंजाईश नहीं सच्ची मोहब्बत में

जहाँ किरदार हल्का हो,

कहानी डूब ही जाती है



तन्हाइयों का एक अलग ही सुरुर होता है

इसमें डर नहीं होता.किसी से बिछड जाने का



जिंदगी बहुत कुछ सिखाती है ,

कभी हँसाती है तो कभी रुलाती है ,

पर जो हर हाल में खुश रहते हैं ,

जिंदगी उन्ही के आगे सर झुकाती है।



थोड़ा मैं ,

थोड़ी तुम,

और थोड़ी सी मोहब्बत

बस इतना काफी है,

जीने के लिये…



हदे शहर से निकली तो गाँव गाँव चली,

कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली,

सफ़र जो धुप का हुआ तो तजुर्बा हुआ,

वो जिंदगी ही क्या जो छाँव छाँव चली।



मुझे अपनी वफादारी पे कोई शक नही होता

मैं खून-ए-दिल मिला देता हु जब झंडा बनाता हु



इरादे बाँधता हूँ सोचता हूँ तोड़ देता हूँ

कही ऐसा ना हो जाए कही वैसा ना हो जाए



ये मंजिलें बड़ी जिद्दी होती हैं,

हासिल कहां नसीब से होती हैं।

मगर वहां तूफान भी हार जाते हैं,

जहां कश्तियां जिद्द पे होती हैं।।



तुम से मिल कर इमली मीठी लगती है….

तुम से बिछड़ कर शहद भी खारा लगता है



नशा था उनके प्यार का

जिसमें हम खो गए

उन्हें भी पता नहीं चला कि कब हम उनके हो गए



नशा हम करते हैं

इलज़ाम शराब को दिया जाता है

मगर इल्ज़ाम शराब का नहीं उनका है

जिनका चेहरा हमें हर जाम में नज़र आता है



अपनों के दरमियां सियासत फ़िजूल है

मक़सद न हो कोई तो बग़ावत फ़िजूल है।

​​रोज़ा,

नमाज़,

सदक़ा-ऐ-ख़ैरात या हो हज

माँ बाप ना खुश हों,

तो इबादत फ़िजूल है।



अपने नहीं तो अपनों का साथ क्या होगा

सपनों में हो उनसे मुलाकात तो क्या होगा

सुबह से शाम तक हमें इंतजार हो जिनका

वादों में कटे रात तो रात का क्या होगा



खींच कर आज मुझे मेरे घर लायी है

मेरे बचपन की यादे मेरे मन में समायी है

अब ना चाहिए मुझे दौलत इस दुनिया की

मेरी माँ की मोहब्बत मेरी उम्र भर की कमाई है

All-time favorite evergreen shero Shayari


23

एक आँसू कह गया सब हाले दिल का

मै समझती थी ये ज़ालिम बे जुबान है


24

तुमसे क्या गिला करना गुजारिश है मिला करना

जिंदगी मेरी आसान होगी बस साँसों में घुला करना


25

दिल होना चाहिए जिगर होना चाहिए

आशिकी के लिए हुनर होना चाहिए

नजर से नजर मिलने पर इश्क नहीं होता

नजर के उस पार भी एक असर होना चाहिए


26

कितने मासूम होते है ये आँखों के आँसू भी

ये निकलते भी उन के लिए है जिन्हे इनकी परवाह तक नहीं होती


27

एक इक बात में सच्चाई है उस की लेकिन

अपने वादों से मुकर जाने को जी चाहता है


28

उडने दो परींदो को अभी शोख हवा में

फिर लौट के बचपन के जमाने नहीं आते


29

मुझे देखने से पहले साफ़ कर;अपनी आँखों की पुतलियाँ ग़ालिब

कहीं ढक ना दे मेरी अच्छाइयों को भी;नज़रों की ये गन्दगी तेरी


30

रात तो अपने समय पर ही होती है

इक तेरा ख्याल है जो कभी भी आ जाता है


31

जो देखता हूँ वही बोलने का आदी हूँ

मैं अपने शहर का सब से बड़ा फ़सादी हूँ


32

ग़ज़लों का हुनर साकी को सिखायेंगे

रोएंगे मगर आँसू नहीं आयेंगे

कह देना समंदर से हम ओस के मोती हैं

दरिया की तरह तुझसे मिलने नहीं आयेंगे


33

समझा है हक़ को अपने ही जानिब हर एक शख़्स

ये चाँद उस के साथ चला जो जिधर गया


34

मेरी यादो मे तुम हो,

या मुझ मे ही तुम हो

मेरे खयालो मे तुम हो,

या मेरा खयाल ही तुम हो

दिल मेरा धडक के पूछे,

बार बार एक ही बात

मेरी जान मे तुम हो,

या मेरी जान ही तुम हो


35

न रख इतना गुरूर अपने नशे में ए शराब

तुझसे ज्यादा नशा रखती हैं आँखे किसी की


36

दीवाने है तेरे नाम के इस बात से इंकार नहीं

कैसे कहें कि तुमसे प्‍यार नहीं

कुछ तो कसूर है आपकी आखों का

हम अकेले तो गुनहगार नहीं


37

इतनी पीता हूँ कि मदहोश रहता हूँ

सब कुछ समझता हूँ पर खामोश रहता हूँ

जो लोग करते हैं मुझे गिराने की कोशिश

मैं अक्सर उन्ही के साथ रहता हूँ


38

मैं सच कहूँगी मगर फिर भी हार जाऊँगी

वो झूट बोलेगा और ला-जवाब कर देगा


39

जिसकी सोच में खुद्दारी की महक है,

जिसके इरादों में हौसले की मिठास है,

और जिसकी नियत में सच्चाई का स्वाद है,

उसकी पूरी जिन्दगी महकता हुआ गुलाब है।


40

देखकर दर्द किसी का जो आह निकल जाती है,

बस इतनी से बात आदमी को इंसान बनाती है ।


41

वाक़िआ कुछ भी हो सच कहने में रुस्वाई है

क्यूँ न ख़ामोश रहूँ अहल-ए-नज़र कहलाऊँ


42

मेरी मोहब्बत की हद मत तय करना तुम…

तुम्हें सांसों से भी ज्यादा मोहब्बत करते हैं हम


43

ताल्लुक़ कौन रखता है किसी नाकाम से लेकिन,

मिले जो कामयाबी सारे रिश्ते बोल पड़ते हैं,

मेरी खूबी पे रहते हैं यहां,

अहल-ए-ज़बां ख़ामोश,

मेरे ऐबों पे चर्चा हो तो,

गूंगे बोल पड़ते हैं।


44

ये ना समझना कि खुशियों के ही तलबगार हैं हम…

तुम अगर अश्क भी बेचो तो,

उसके भी खरीददार हैं हम…


45

कितनी पी कैसे कटी रात मुझे होश नहीं

रात के साथ गई बात मुझे होश नहीं

मुझको ये भी नहीं मालूम कि जाना है कहाँ

थाम ले कोई मेरा हाथ मुझे होश नहीं


46

बहाना मिल न जाये बिजलियों को टूट पड़ने का

कलेजा काँपता है आशियाँ को आशियाँ कहते


Sher Shayari Hindi mai

47

चले गए है दूर कुछ पल के लिए

मगर करीब है हर पल के लिए

किसे भुलायेंगे आपको एक पल केलिए

जब हो चूका है प्यार उम्र भर के लिए


48

लडते रहते हैं दो मुल्कों की तरह तुम्हारे लिए

तुम्हारी क्या खता है इसमें तुम हो ही कश्मीर सी सुंदर


49

मुस्कुराने की आदत भी कितनी महंगी पड़ी हमें…

छोड़ गया वो ये सोच कर कि हम जुदाई में भी खुश हैं

All-time favorite evergreen shero Shayari


50

कैसे लिखोगे मोहब्बत की किताब

तुम तो करने लगे पल-पल का हिसाब


51

दीवाने है तेरे नाम के इस बात से इंकार नहीं

कैसे कहें कि तुमसे प्‍यार नहीं

कुछ तो कसूर है आपकी आखों का

हम अकेले तो गुनहगार नहीं


52

शायरी नही आती मुझे बस हेल दिल सुना रही हूँ

बेवफाई का इलज़ाम है मुझपर फिर भी गुनगुना रही हूँ

क़त्ल करने वालो ने कातिल भी हमे ही बना दिया

खफा नही उससे फिर भी मै बस उसका दामन बचा रही हूँ


53

कांच जैसे होते हैं हम तन्हां जैसे लोगों के दिल,

कभी टूट जाते हैं और कभी तोड़ दिए जाते हैं


54

मौसम बदल गये जमाने बदल गये

लम्हों में दोस्त बरसों पुराने बदल गये

दिन भर रहे जो मेरी मौहब्बत की छॉंव में

वो लोग धूप ढलते ही ठिकाने बदल गये


55

हजारों ऐब हैं मुझमे,

न कोई हुनर बेशक,

मेरी खामी को तुम खूबी में तब्दील कर देना,

मेरी हस्ती है एक खारे समंदर से मेरे दाता,

अपनी रहमतों से इसे मीठी झील कर देना।


56

शायरी उसी के लबों पर सजती है साहिब

जिसकी आँखों में __इश्क़__ रोता हो


57

तुम्हारी सुन्दर आँखों का मकसद कहीं ये तो नहीं

कि जिसको देख लें उसे बरबाद कर दें


58

कभी नजरे मिलानेे मे जमाना बीत जाता है

कभी नजरे चुराने मे जमाना बीत जाता है


59

मुझसे बेवफाई की इन्तहा क्या पूछते हो

वह मुझसे मोहब्बत दिखती है किसी और के लिए


60

किसी ने आज पूछा हमसे कहाँ से लाते हो ये शायरी

मैं मुस्करा के बोला: उसके ख्यालो मे डूब कर


61

उसी की तरह मुझे सारा ज़माना चाहे

वो मेरा होने से ज़्यादा मुझे पाना चाहे

मेरी पलकों से फिसल जाता है चेहरा उसका

ये मुसाफ़िर तो कोई और ठिकाना चाहे

एक बनफूल था इस शहर में वो भी न रहा

कोई अब किस के लिए लौट के आना चाहे


62

कभी मतलब के लिए तो कभी बस दिल्लगी के लिए

हर कोई मोहाब्बत ढूँढ़ रहा है यहाँ अपनी तन्हा सी ज़िन्दगी के लिए


63

मेरी नजरों की तरफ देख जमानें पे न जा

इक नजर फेर ले,

जीने की इजाजत दे दे

रुठ ने वाले वो पहली सी मोहब्बत दे दे

इश्क मासुम है,

इल्जाम लगाने पे न जा


64

रूकता भी नहीं ठीक से चलता भी नही

यह दिल है के तेरे बाद सँभलता ही नही


65

वो नाकाम मोहब्बत है तू कर एक और मोहब्बत

सुना हूँ इश्क दर्द भी है दवा भी


66

क्या लाज़वाब था तेरा छोड़ के जाना…

भरी भरी आंखों से मुस्कुराये थे हम


67

सुर्ख आँखों से जब वो देखते हैं

हम घबराकर आँखें झुका लेते हैं

क्यों मिलायें उन आँखों से आँखें

सुना है वो आँखों से ही अपना बना लेते हैं


68

जिसकी चाहत मे हमने सारी दुनियॉ भुला दी

उस शखस ने दो पल मे ही हमारी हसती मिटा दी.

मिटा तो हम भी सकते थे पहचान उसकी दिल से

पर उसकी मासूमियत को देखकर हमने

अपनी ये आरजू भी भुला दी.


69

रूठे जो जिदगी तो मना लेगे हम

मिले जो गम तो निभा लेगे हम बस तुम रहना साथ हमारे

पिघलते आँसू मे भी मुस्कुरा लेग


70

झूट वाले कहीं से कहीं बढ़ गए

और मैं था कि सच बोलता रह गया


71

इश्क़ में कौन बता सकता है

किस ने किस से सच बोला है


72

आंखे थी जो कह गई सब कुछ

लफ्ज होते तो मुकर गए होते।


73

वो मेरे हाथो की लकीरे देखकर अक्सर Mayush हो जाती थी

शायद उसे भी एहसास हो गया था कि वो मेरी Kismat मे नही


74

यूँ असर डाला है मतलब-परस्ती ने दुनिया पर कि,

हाल भी पूछो तो लोग समझते हैं,

कोई काम होगा ।


75

मुझे मालूम नहीं कि मेरी आँखों को तलाश किस की है

पर तुझे देखूं तो बस मंज़िल का गुमान होता है


76

औरों की तरह ‘मैं नहीं लिखता ‘डायरियाँ

बस ‘याद आती है तेरी’और ‘बन जाती है’शायरिया


77

तुम से बेहतर तो नहीं हैं…ये नजारे,

लेकिन.

तुम जरा आँख से निकलो,

तो…. इन्हें भी देखूं


78

तेरी आजमाइश कुछ ऐसी थी खुदा,

आदमी हुआ है आदमी से जुदा,

ज़माने को ज़माने की लगती होगी,

पर धरती को किसकी लगी है बाद दुआ,

उदासी से तूफान के बाद परिंदे ने कहा,

चलो फिर आशियाँ बनाते हैं जो हुआ सो हुआ।

All-time favorite evergreen shero Shayari


79

प्यार कहो तो दो ढाई लफज़,

मानो तो बन्दगी

सोचो तो गहरा सागर,

डूबो तो ज़िन्दगी

करो तो आसान ,

निभाओ तो मुश्किल

बिखरे तो सारा जहाँ ,

और सिमटे तो ” तुम


80

हमारे इकरार के इरादे को दे जाता है हर रोज शिकस्त

किसी और के लिये तेरा हल्का सा महफील मे मुस्कुरा देना


81

कभी ख़ुशी से खुशी की तरफ़ नहीं देखा

तुम्हारे बाद किसी की तरफ़ नहीं देखा

ये सोचकर कि तेरा इन्तज़ार लाजमी है

तमाम उम्र घड़ी की तरफ़ नहीं देखा


82

पूछता है जब कोई दुनिया में मोहब्बत है कहाँ,

मुस्करा देता हूँ और याद आ जाती है माँ।


83

साथ ना रहने से रिश्ते टूटा नहीं करते

वक़्त की धुंध से लम्हे टूटा नहीं करते

लोग कहते हैं कि मेरा सपना टूट गया

टूटी नींद है ,

सपने टूटा नहीं करते


84

तु कोशिश तो कर किसी गरीब की मदत करने की

ये तेरे होठ खुद व खुद ही मुस्करा देंगे


85

आसमानों से फ़रिश्ते जो उतारे जाएँ

वो भी इस दौर में सच बोलें तो मारे जाएँ


86

हो ना जाए हुश्न की शान में गुस्ताखी कही

तुम चले जाओ तुम्हे देख कर प्यार आता है


87

तेरे लफ़्ज़ों को शिद्दत से पढ़ने में सुकून मिलता है

तुम्हारी इन प्यारी यादों को भूलना ही कौन चाहता है


88

रंगों के बिना जिंदगी में रंग क्या होगा

तुम नहीं तो जिंदगी का ढंग क्या होगा

तुम्हारे बिना कटता नहीं इक पल हमारा

तन्हाईयों से भरी रात का संग क्या होगा


89

किस काम की ऐसी सच्चाई जो तोड़ दे उम्मीदें दिल की

थोड़ी सी तसल्ली हो तो गई माना कि वो बोल के झूट गया


90

भटके हुओं को जिंदगी में राह दिखलाते हुए,

हमने गुजारी जिंदगी दीवाना कहलाते हुआ।


91

ज़मीर जिन्दा रख,

कबीर जिंदा रख,

सुल्तान भी बन जाये तो,

दिल में फ़कीर जिंदा रख,

हौसले के तरकश में कोशिश का वो तीर जिंदा रख,

हार जा चाहे जिंदगी में सब कुछ,

मगर फिर से जीतने की उम्मीद जिंदा रख।


92

जमीन जल चुकी है आसमान बाकि है ,

वो जो खेतों की मदों पर उदास बैठे हैं,

उन्ही की आँखों में अब तक ईमान बाकि है ,

बादलों अब तो बरस जाओ सूखी जमीनों पर ,

किसी का घर गिरवी है और किसी का लगान बाकि है ।


93

उल्फत में अक्सर ऐसा होता है

आँखे हंसती हैं और दिल रोता है

मानते हो तुम जिसे मंजिल अपनी

हमसफर उनका कोई और होता है


94

काम उनके जो बस काम किया करते हैं

अपने सपनों को अंजाम दिया करते हैं

पता नहीं फिर कुछ लोग रंग क्यों बदलते हैं

मुश्किल उनसे जो बदनाम किया करते हैं


95

सोचता हूँ बंद करूँ लिखना शायरी ये किसी के काम नहीं आती

उसकी याद तो दिलाती है पर उस का दीदार नहीं कराती


96

पता नही कब जाएगी तेरी लापरवाही की आदत

पगली कुछ तो सम्भाल कर रखती,

मुझे भी खो दिया


97

दोस्ती अच्छी हो तो रंग़ लाती है

दोस्ती गहरी हो तो सबको भाती है

दोस्ती नादान हो तो टूट जाती है

पर अगर दोस्ती अपने जैसी हो

तो इतिहास बनाती है


98

झूट बोला है तो क़ाएम भी रहो उस पर ‘ज़फ़र’

आदमी को साहब-ए-किरदार होना चाहिए


99

मेरी महोब्बत का अन्दाजा कभी मत लगाना …

हिसाब हम लेंगे नहीं और चुका तुम पाओगे नहीं


100

कभी मतलब के लिए तो कभी बस दिल्लगी के लिए

हर कोई मोहाब्बत ढूँढ़ रहा है यहाँ

अपनी तन्हा सी ज़िन्दगी के लिए


101

दिन तो जैसे तैसे गुजर जाता है

रात कि तन्हाई बहुत सताती है

इतना तो क़रीब रहो दूर ना लगे

जिंदगी भी अजानबी सी लगती है


102

कहिए जो झूट तो हम होते हैं कह के रुस्वा

सच कहिए तो ज़माना यारो नहीं है सच का


103

ताउम्र बस एक ही सबक याद रखिये,

दोस्ती और इबादत में नीयत साफ़ रखिये।


104

जी बहुत चाहता है सच बोलें

क्या करें हौसला नहीं होता


105

हुस्न वालों को क्या जरूरत है संवरने की

वो तो सादगी में भी क़यामत की अदा रखते हैं


106

जिन्हें ये फ़िक्र नहीं सर रहे रहे न रहे

वो सच ही कहते हैं जब बोलने पे आते हैं


107

बचपन भी कमाल का था खेलते खेलते चाहें छत पर

सोयें या ज़मीन पर,

आँख बिस्तर पर ही खुलती थी


108

ना प्यार काम हुआ हा न ही प्यार का अहेसास

बस उसके बिना ज़िन्दगी काटने की आदत हो गई


109

आहटों से कह दो कि आहटें ना करें,

,

मेरा महबूब सो रहा है मेरी पलकों में


110

ज़र्रे जर्रे में छुपा है हौसलेवालों का जोश

पैदा होते है इसी मिट्टी से ही सरफ़रोश


111

ये सोचकर उसके हर बात पे यकींन किया था मैंने

की इतने हसीन होंठ झूठ कैसे बोलेंगे


112

कभी सोचता हूँ वो क्यों मिला मुझे

फिर सोचता हूँ वो क्यों नहीं मिला मुझे


113

मैं सच तो बोलता हूँ मगर ऐ ख़ुदा-ए-हर्फ़

तू जिस में सोचता है मुझे वो ज़बान दे


114

मै तेरा कुछ भी नहीं हूँ,

मगर इतना तो बता

देखकर मुझको तेरे जेहन में आता क्या है


115

मोहब्बत से,

इनायत से,

वफ़ा से चोट लगती है

बिखरता फूल हूँ,

मुझको हवा से चोट लगती है

मेरी आँखों में आँसू की तरह इक रात आ जाओ

तकल्लुफ़ से,

बनावट से,

अदा से चोट लगती है


116

वो कम-सुख़न था मगर ऐसा कम-सुख़न भी न था

कि सच ही बोलता था जब भी बोलता था बहुत


117

तुम एक महंगे खिलोने हो और मै एक गरीब का बच्चा

मेरी हसरत ही रहेगी तुझे अपना बनाने की


118

अच्छा दोस्त जिंदगी को जन्नत बनाता है

इसलिए मेरी कद्र किया करो वर्ना फिर कहते फिरोगे

“बहती हवा सा था वो; यार हमारा था वो; कहाँ गया उसे ढूढों


119

मैं उस से झूट भी बोलूँ तो मुझ से सच बोले

मिरे मिज़ाज के सब मौसमों का साथी हो


120

नशा हम किया करते है

इलज़ाम शराब को दिया करते है

कसूर शराब का नहीं उनका है

जिनका चहेरा हम जाम मै तलाश किया करते है


121

चेहरा है जैसे झील में हँसता हुआ कवंल

या ज़िन्दगी के साज़ पे छेड़ी हुई ग़ज़ल

जाने बहार तुम किसी शायर का ख्वाब हो


122

सच के सौदे में न पड़ना कि ख़सारा होगा

जो हुआ हाल हमारा सो तुम्हारा होगा


123

कोई नहीं याद करता वफ़ा करने वालों को,

मेरी मानों बेवफा हो जाओ ज़माना याद रखेगा


124

जो मांगू वो दे दिया कर ऐ-जिंदगी …कभी तो तू मेरी माँ जैसी बन जा


125

रात को रात कह दिया मैं ने

सुनते ही बौखला गई दुनिया


126

भूले नहीं हम उसे और भूलेगें भी नहीं

बस नज़र अंदाज करेंगे उसे उसी की तरह


127

बहके कदम तो गिरे उनकी बाँहों मे जा कर

आज हमारा पीना ही हमारे काम आ गया


128

मोहब्बत रोग है दिल का इसे दिल पे ही छोड़ दे

दिमाग को अगर बचा लो तो भी गनीमत हो


129

वफ़ा के शहर में अब लोग झूट बोलते हैं

तू आ रहा है मगर सच को मानता है तो आ


130

मुझे तैरने दे या फिर बहाना सिखा दे,

अपनी रजा में अब तू रहना सिखा दे,

मुझे शिकवा न हो कभी किसी से,

हे ईश्वर,

मुझे सुख और दुःख के पर जीना सिखा दे।


131

तू ही बता दे जरिया कोई और जीने का,

शौक़ आदत में बदल रहा है पीने का


132

जरूरत और चाहत में बहुत फ़र्क है

तालमेल बिठाते बिठाते ज़िन्दगी गुज़र जाती है


133

तेरी हुश्न की तारीफ में एक किताब लिख दिया

कास तेरी वफा भी तेरी हुश्न के बराबर होता


134

कोई प्यार से जरा सी फूंक मार दे,

तो मैं बुझ जाऊं..

नफरत से तो तूफान भी… हार गए मुझे बुझाने में ।।


135

काम उनके जो बस काम किया करते हैं

अपने सपनों को अंजाम दिया करते हैं

पता नहीं फिर कुछ लोग रंग क्यों बदलते हैं

मुश्किल उनसे जो बदनाम किया करते हैं


136

खामोशियाँ – बहुत कुछ कहती हैं

कान नही दिल लगा कर सुनना पड़ता है


137

ना हवस तेरे जिस्म की,

ना शौक तेरी खूबसूरती का

बेमतलबी सा बन्दा हूँ .

बस तेरी सादगी पे मरता हूँ


138

भरे बाजार से अक्सर ख़ाली हाथ ही लौट आता हूँ,

पहले पैसे नहीं थे अब ख्वाहिशें नहीं रहीं।


139

चले गए है दूर कुछ पल के लिए

मगर करीब है हर पल के लिए

किसे भुलायेंगे आपको एक पल केलिए

जब हो चूका है प्यार उम्र भर के लिए


140

इतना सच बोल कि होंटों का तबस्सुम न बुझे

रौशनी ख़त्म न कर आगे अँधेरा होगा


141

आये हो आँखों में तो कुछ देर तो ठहर जाओ

एक उम्र लग जाती है एक ख्वाब सजाने में


142

चल पड़ते है कदम जिस तरफ़ तेरी याद मिले

हर सफ़र का हो कोई मकाम ज़रूरी तो नही

बगिया लगती है खुबसूरत,

हसीन फूलों से

खुशबू बिखेरे वोह तमाम ज़रूरी तो नही

बहेकने के लिए तेरा एक खयाल काफी है सनम

हाथो मे हो फ़िर से कोई जाम ज़रूरी तो नही


143

मिलावट है तेरे इश्क में इत्र और शराब की

कभी हम महक जाते हैं तो कभी बहक जाते हैं


144

तुम एक दिन लौट के आओगे मुझे इतना यकीन है

ये और बात है मै रहू या ना रहू इस दुनिया में


145

जिसकी जितनी परवाह की जाये वो

उतना ही बे-परवाह हो जाता है


146

हम अल्फाजो को ढूढते रह गए

और वो आँखों से गज़ल कह गए


147

खाली हो चला दिल अहसासों से

न दिल कुछ कहता है न कलम कुछ लिखती है


148

कुछ लोग जो ख़ामोश हैं ये सोच रहे हैं

सच बोलेंगे जब सच के ज़रा दाम बढ़ेंगे


149

मुस्कुराते हैं तो बिजली सी गिरा देते हैं

बात करते हैं तो दीवाना बना देते हैं

हुस्न वालों की नजर कयामत से कम नहीं

आग पानी में भी नजरों से लगा देते हैं


150

हर हक़ीक़त है एक हुस्न ‘हफ़ीज़’

और हर हुस्न इक हक़ीक़त है


151

तु है सुरज तुझे मालुम कहां रात का दुख

तु किसी रोज मेरे घर मे उतर शाम के बाद


152

हम तो वो हे जो तेरी बातेँ सुन कर तेरे हो गए थे

वो और होंगे जिन्हे मोहब्बत चेहरो से होती हो


153

अपनी उलझन में ही अपनी,

मुश्किलों के हल मिले ,

जैसे टेढ़ी मेढ़ी शाखों पर भी रसीले फल मिले ,

उसके खारेपन में भी कोई तो कशिश जरुर होगी,

वर्ना क्यूँ जाकर सागर से यूँ गंगाजल मिले ।


154

जिसने कहा कल,

दिन गया टल,

जिसने कहा परसों,

बीत गए बरसो

जिसने कहा आज,

उसने किया राज।


155

कुछ रिश्तों को कभी भी… नाम ना देना तुम

इन्हें चलने दो ऐसे ही… इल्ज़ाम ना देना तुम

ऐसे ही रहने दो तुम… तिश्नग़ी हर लफ़्ज़ में

के अल्फ़ाज़ों को मेरे… अंज़ाम ना देना तुम


156

दुनिया की भीड़ में तुझे याद कर सकूँ कुछ पल

अजनबी राहों की तरफ कदम मोड़ता हूँ


157

मेरे लफ़्ज़ों को इतनी शिद्दत से न पढ़ा करो

कुछ याद रह गया तो…हमें भूल नहीं पाओगे


158

सोचता हूँ बंद करूँ लिखना शायरी ये किसी के काम नहीं आती

उसकी याद तो दिलाती है पर उस की झलक नहीं दिखाती


159

आँसुओं और शराबों में गुजारी है हयात

मैं ने कब देखी थी बरसात मुझे होश नहीं

जाने क्या टूटा है पैमाना कि दिल है मेरा

बिखरे-बिखरे हैं खयालात मुझे होश नहीं


160

मैं अपनी सुबह शाम यूँ ही गुजार लेता हूँ

जो भी ज़ख्म मिलते हैं कागज़ पे उतार लेता हूँ


161

मुस्कुरा देता हूँ अक्सर देखकर पुराने खत तेरे

तू झूठ भी कितनी सच्चाई से लिखती थी


162

मेरी यादो मे तुम हो,

या मुझ मे ही तुम हो

मेरे खयालो मे तुम हो,

या मेरा खयाल ही तुम हो

दिल मेरा धडक के पूछे,

बार बार एक ही बात

मेरी जान मे तुम हो,

या मेरी जान ही तुम हो


163

आपका चेहरा हसीन_गुलाबो से मिलता_जुलता है

नशा पीने से ज्यादा तुमको देखने से चढ़ता है

All-time favorite evergreen shero Shayari


164

काश मैं ऐसी शायरी लिखूँ तेरी याद में

तेरी शक्ल दिखाई दे हर अल्फ़ाज़ में


165

हर वक़्त उसी के ख्यालों में खोए रहते हैं…

और उसे शिकायत है कि मुझे खुद से फुर्सत नहीं मिलती


166

कभी काली सियाह रातें हमें एक पल की लगती है

कभी एक पल बिताने मे जमाने बीत जाते है


167

आप मुझसे मिलने आये है

बैठी़ये मै खुद को बुला के लाता हुं


168

खामोशियो से युँ न मुझको सज़ा दो

दिल की बात को हौले हौले से कह दो


169

चले गए है दूर कुछ पल के लिए

मगर करीब है हर पल के लिए

किसे भुलायेंगे आपको एक पल के लिए

जब हो चूका है प्यार उम्र भर के लिए


170

मोहब्बत का कोई रंग नही फिर भी वो रंगीन है

प्यार का कोई चेहरा नही फिर भी वो हसीन हैं


171

इतना भी गुमान न कर अपनी जीत पर ऐ बेखबर

शहर में तेरे जीत से ज्यादा चर्चे तो मेरी हार के हैं


172

उमर बीत गई पर एक जरा सी बात समझ में नहीं आई

हो जाए जिनसे महोब्बत,

वो लोग कदर क्यूं नहीं करते


173

आधे दुःख गलत लोगो से उम्मीद रखने से होते है

और बाकी आधे सच्चे लोगो पे शक करने से होते है


174

उसकी चाहत के दो लम्हे बड़े ही जानलेवा थे

पहले मोहब्बत का इक़रार फिर मोहब्बत से इनकार


175

कर लेता हूँ बर्दाश्त हर दर्द इसी आस के साथ,

कि खुदा नूर भी बरसाता है … आज़माइशों के बाद


176

पंछी ने जब जब किया पंखों पर विश्वास,

दूर दूर तक हो गया उसका ही आकाश।


177

शायर कहकर बदनाम ना कर मुझे

मैं तो रोज़ शाम को दिनभर का हिसाब लिखता हूँ


178

जो नफरत उसको दिखाई थी कुछ यूँ बेकार हो गई

जुबान मेरे बस में रहीं,

और आँखे गद्दार हो गई


179

शायरी में सिमटते कहाँ है दिल के दर्द दोस्तों

बहला रहे हैं ख़ुद को ज़रा काग़ज़ों के साथ


180

मुझसे नफरत करके भी खुश ना रह पाओगे

मुझसे दूर जाकर भी पास ही पाओगे

प्यार में दिमाग पर नहीं दिल पर ऐतबार करके देखिये

अपने आप को रोम – रोम में बसा पाएँगे


181

याद तेरी आती है क्यो.यू तड़पाती है क्यो

दूर है जब जाना था.. फिर रूलाती है क्यो

दर्द हुआ है ऐसे,

जले पे नमक जैसे

खुद को भी जानता नही,

तुझे भूलाऊ कैसे


182

रोज रोज गिरकर भी मुकम्मल खड़ा हूँ,

ऐ मुश्किलों देखो मैं तुमसे कितना बड़ा हूँ।


183

चलते रहेगें शायरी के दौर मेरे बिना भी

एक शायर के कम हो जाने से शायरी खत्म नहीं हो जाती


184

वो इश्क के क़िस्से,

पुराने हो गए

उनसे बिछड़े हमें,

ज़माने हो गए

शमा तो जली इंत्ज़ार में रात भर

परवाने के झूठे सब,

बहाने हो गए


185

जिंदगी देने वाले,

मरता छोड़ गये

अपनापन जताने वाले तन्हा छोड़ गये

जब पड़ी जरूरत हमें अपने हमसफर की

वो जो साथ चलने वाले रास्ता मोड़ गये


186

ये कैसे मुनकिन है कि जिंदगी में गम न मिले

कोई हमें न मिला किसी को हम न मिले

क्या चाल चली है मेरे मुक्दर ने मुझसे

प्यार तेरा मिला मगर तुम न मिले


187

मेरे टूटने की वजह मेरे जौहरी से पूछो

उस की ख्वाहिश थी कि मुझे थोडा और तराशा जाये


188

आँसुओं और शराबों में गुजारी है हयात

मैं ने कब देखी थी बरसात मुझे होश नहीं

जाने क्या टूटा है पैमाना कि दिल है मेरा

बिखरे-बिखरे हैं खयालात मुझे होश नहीं


189

कुछ फासले तुम भी तो मिटाओ जान..हम तुम तक आये,

तो कहाँ तक आये


190

वो मस्जिद की खीर भी खाता है

और मंदिर का लड्डू भी खाता है ,

वो भूखा है साहब इसे मजहब कहाँ समझ आता है।


191

मौसम सर्द है और फिजां भी सुहानी है

बस तुम ,

तुम्हारी यादें और बाकि सब बेमानी है


192

सीख जाओ वक़्त पर किसी की चाहत की कदर करना

कही कोई थक ना जाए तुम्हे अहसास दिलाते दिलाते


193

मैं क्या हूँ ,

कैसा हूँ ,

जमाना सब जाने

खुली किताब सा जीवन हर कोई पहचाने

नेकी हो सदा मन में ,

हो लबों पर प्रेम तराने

खुशियाँ बांटू सबको ,

गम के किस्से हो पुराने


194

हवाओं की भी अपनी अजब सियासतें हैं

कहीं बुझी राख भड़का दे कहीं जलते चिराग बुझा दे


195

हर किसी कै किसमत मै ऐसा लिखा नही हौता .

. हर मंजिल मै तैरै जैसा दौस्त का पाता नही मिलता

मैरी तकादीर हौगी कुछ खास

वरना तैरै जैसा यार मुझै कहा मिलता


196

जो वक्त पे रिप्लाइ नहीं देती

वो वक्त पे साथ क्या देगी


197

आग़ाजे़-आशिक़ी का मज़ा आप जानिये

अंजामे-आशिक़ी का मज़ा हमसे पूछिये


198

दुर रहने से मोहब्बत बढती है

यह कह कर वो शख्स मेरा शहर छोङ गया


199

जो तू साथ न छोड़े ता-उम्र मेरा ए मेहबूब

मौत के फ़रिश्ते को भी इनकार न कर दूं तो कहना

इतनी कशिश है मेरी मुहब्बत की तासीर में

दूर हो के भी तुझ पे असर न कर दूं तो कहना


200

मैंने उसे बोला ये आसमान कितना बड़ा है ना

पगली ने गले लगाया और कहा इससे बड़ा तो नहीं


201

तरसेगा जब दिल तुम्हारा मेरी मुलाकात को

ख्वाबो मे होगे तुम्हारे हम उसी रात को


202

झूठा अपनापन तो हर कोई जताता है,

वो अपना ही क्या जो पल पल सताता है,

यकीं न करना हर किसी पर क्यूंकि,

करीब कितना है कोई यह तो वक्त बताता है ।


203

किसी ने आज पूछा,

कहा से ढूढ लाते हो एसी शायरी

में मुस्कुरा के बोला उसके खयालो में डूबकी लगा कर


204

सादिक़ हूँ अपने क़ौल का ‘ग़ालिब’ ख़ुदा गवाह

कहता हूँ सच कि झूट की आदत नहीं मुझे


205

जरुरी नहीं की हर समय लबों पर खुदा का नाम आये,

वो लम्हा भी इबादत का होता है जब इंसान किसी के काम आये।


206

न जाने किस *रूप* मे आता हैं

हाथ पकड़ कर *पार* लगा देता है

मैं उसके सामने सिर *झुकाता* हूँ,

वो सबके के सामने मेरा सिर *उठाता* हैं


207

ज़हर मीठा हो तो पीने में मज़ा आता है

बात सच कहिए मगर यूँ कि हक़ीक़त न लगे



कभी हमको हंसाती है, कभी हमको रूलाती है

जिन्हें जीना नहीं आता, उन्हें जीना सिखाती है,

खुदा के नाम पर लिखी, ये दीवानों की पाती है

मोहब्बत की नहीं जाती, मोहब्बत खुद हो जाती है।


खुदा के सामने दिल से इबादत कौन करता है

तिरंगा हाथ में लेकर शहादत कौन करता है

ये कसमें और वादे चार दिन में टूट जाते हैं

वो लैला और मजनूं सी मोहब्बत कौन करता है।


जीतने में क्या मिलेगा, जो मजा है हार में

जिन्दगी का फलसफा है, प्यार के व्यापार में

हम तो तन्हा थे, हमारा नाम लेवा भी न था

इस मोहब्बत से हुआ चर्चा सरे बाजार में।


सदा मिलने की चाहत की, जुदा होना नहीं मांगा

हमें इंसान प्यारे हैं, खुदा होना नहीं मांगा

हमेशा मंदिरों मस्जिद में, मांगा है मोहब्बत को

कभी चांदी नही मांगी, कभी सोना नहीं मांगा।

नदी...

हर इक मूरत ज़रूरत भर का, पत्थर ढूंढ लेती है

कि जैसे नींद अपने आप, बिस्तर ढूंढ लेती है

अगर हो हौसला दिल में, तो मंजिल मिल ही जाती है

नदी ख़ुद अपने क़दमों से, समन्दर ढूंढ लेती है


तू नदी है तो अलग अपना, रास्ता रखना

न किसी राह के, पत्थर से वास्ता रखना

पास जाएगी तो खुद, उसमें डूब जाएगी

अगर मिले भी समन्दर, तो फासला रखना


वो जिनके दम से जहां में, तेरी खुदाई है

उन्हीं लोगों के लबों से, ये सदा आई है

समन्दर तो बना दिए, मगर बता मौला

तूने सहरा में नदी, क्यूं नहीं बनाई है


हौसलों को रात दिन, दिखला रही है देखिए

परबतों से लड़ रही, बल खा रही है देखिए

किसकी हिम्मत है जो, उसको रोक लेगा राह में


 

सरकार...

विकास योजना तैयार किए बैठे हैं

सबकी उम्मीद तार-तार किए बैठे हैं

हमने सरकारी महक़मों में जाके देखा है

जुगुनू सूरज को गिरफ्तार किए बैठे हैं


भाव सेवा का दिखाने में लगे हैं प्यारे

बिना पानी के नहाने में लगे हैं प्यारे

जिनसे उम्मीद थी खुशियों की सुबह लाएंगे

अपनी सरकार बचाने में लगे हैं प्यारे


लगता है घर के आंगन को दीवार खा गई

दरिया चढा तो नाव को पतवार खा गई

सारी विकास योजनाएं फाइलों में हैं

जनता के सारे ख्वाब तो सरकार खा गई


ख़ुशबू की खिलाफत का फैसला तो देखिए

आएगा किसी रोज़, जलजला तो देखिए

सूरज को भी गुमराह कर रहे हैं दोस्तो

सरकारी चराग़ों का हौसला तो देखिए

 

फूल...

महकती हुई जिन्दगी बांटते हैं

ज़माने में सबको ख़ुशी बांटते हैं

भले उनकी किस्मत में कांटे लिखे हों

मगर फूल हमको हंसी बांटते हैं


सोने चांदी को खजानों में रखा जाता है

बूढे लोगों को दालानों में रखा जाता है

रंग होते हैं बस, खुशबू नहीं होती जिनमें

उन्हीं फूलों को गुलदानों में रखा जाता है


ग़मों के बीच भी जो लोग मुस्कराते हैं

वही इंसानियत का हौसला बढाते हैं

लोग कांटों को तो छूने से भी कतराते हैं

फूल होते हैं तो पहलू में रखे जाते हैं


चाहत के बदले नफ़रत का, नश्तर लेकर बैठे हैं

पीने का पानी मांगा तो, सागर लेकर बैठे हैं

लाख भलाई कर लो, लेकिन लोग बुराई करते हैं

हमने जिनको फूल दिए, वो पत्थर लेकर बैठे हैं

गुरु...

मिट जाएगा सब अंधियारा, शिक्षा का गुणगान करो

बांटे से बढ़ता है ये तो, सदा ज्ञान का दान करो

इस धरती पर गुरूवार ही हमको, परम सत्य बतलाता है

अर्जुन जैसा बनना है तो, गुरूओं का सम्मान करो


सदा ज्ञान के पृष्ठ काले मिलेंगे

जेहन में मकडियों के जाले मिलेंगे

भटकते रहोगे अंधेरों में हरदम

गुरूवार के बिना ना उजाले मिलेंगे


ज्ञान के पांव का गोखुरू हो गये

भीड़ देखी तो फ़ौरन शुरू हो गये

आ गये चैनलों पर चमकने लगे

चन्द चेले जुटाकर गुरू हो गये


ट्यूशन पढ़ा-पढ़ा के मालामाल हो गये

और ज्ञान के सागर के सूखे ताल हो गये

किसका अंगूठा मांग लें, हैं इस फिराक़ में

पहले के गुरू अब गुरू घंटाल हो गये


“अधूरे मिलन की आस हैं जिंदगी,सुख-दुःख का एहसास हैं जिंदगी,

फुरसत मिले तो ख्वाबो में आया करो,आप के बिना बड़ी उदास हैं जिंदगी “


Pyar Bhari Shayari 


हमारी गलतियों से कही टूट न जाना,

हमारी शरारत से कही रूठ न जाना,

तुम्हारी चाहत ही हमारी जिंदगी हैं,

इस प्यारे से बंधन को भूल न जाना.


Pyar Bhari Shayari 


🌹 Pyar Shayari 🌹

“उसकी याद हमें बेचैन बना जाती हैं,

हर जगह हमें उसकी सूरत नज़र आती हैं,

कैसा हाल किया हैं मेरा आपके प्यार ने,

नींद भी आती हैं तो आँखे बुरा मान जाती हैं.”


पैसा कमाने के लिए इतना वक़्त खर्च ना करो की

पैसा खर्च करने के लिए ज़िन्दगी में वक़्त ही न मिले

 

Pyar Bhari Shayari 


“हर वक्त मुस्कुराना फिदरत हैं हमारी,

आप यूँ ही खुश रहे हसरत हैं हमारी,

आपको हम याद आये या ना आये,

आपको याद करना आदत हैं हमारी.”


जब तक था दम में दम न दबे आसमाँ से हम, जब दम निकल गया तो ज़मीं

ने दबा लिया।


💜 Pyar Bhari Shayari 💜


“हम वो नहीं की भूल जाया करते हैं,

हम वो नहीं जो निभाया करते हैं,

दूर रहकर मिलना सायद मुस्किल हो,

पर याद करके सांसो में बस जाया करते हैं.”

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