header ads

100+ SAD GAZAL SHAYARI STATUS HINDI

100+ SAD GAZAL SHAYARI LYRICS STATUS

Heart broken ghazal in hindi touching ghazal in hindi sad gazal status in hindi romantic ghazal in hindi font ghazal on life in hindi motivational ghazal 

कुछ बातें अधूरी हैं, कहना भी ज़रूरी है,

बिछड़ना मजबूरी था, मिलना भी ज़रूरी है।


आज सुन भी जाओ, ये फलसफा जो मजबूरी है,

दिल तोड़ना फिर सिलना, ये कैसी फितूरी है।

SAD GAZAL SHAYARI STATUS HINDI


दिल के बंजर पड़े दीवार में, इश्क की बूंदें पड़ना ज़रूरी है,

धड़कन रुक न जाए कहीं, ये सांसों को समझना भी ज़रूरी है।


नहीं संभालता ये इश्क़ अब, टूटकर बाहों में बिखरना ज़रूरी है,

तुम समेट लो बाहों में हमें, इश्क की यही दस्तूरी है।

जो बातें अधूरी हैं, कहना भी ज़रूरी है,

हां दूर रहना मजबूरी है, दिल लगना भी ज़रूरी है।


मिलना है तुझसे खुद को खोने से पहले, आज गले लगना ज़रूरी है,

यादों में ही टूटकर जीना है अब, ये जो जीवन अधूरी है।


नहीं रुकता सिलसिला दर्द का, अश्क को गिरना भी ज़रूरी है,

फिर से अश्क को दिल के दरिया में संभालना, ये कैसी मजबूरी है।


तुम पास आ जाओ, ये धड़कन सुनना भी ज़रूरी है,

मन की जो प्रीत अधूरी है, प्रीत की रीत करना जो पूरी है।

तेरे लबों से खुशबू चुराके, तेरी दिल की धड़कनों को बढ़ाना भी ज़रूरी है,

आओ प्यास बुझा जाए, ये जो वर्षों की दूरी है, हां जो मिलन अधूरी है।


कुछ बातें अधूरी हैं, कहना भी ज़रूरी है,

हां दूर रहना मजबूरी है, तो दिल लगना भी ज़रूरी है।


नज़र उची की तो दुआ बन गई

नज़र नीची की तो हया बन गई

नज़र तिरछी की तो अदा बन गई

नज़र फेर ली तो कज़ा बन गई


रौशनी को शराब कहते है

जाम को आफताब कहते है

रुख को पर्दे में ढापने वालो

हुस्न को बेनकाब कहते है


पत्ती पत्ती गुलाब हो जाती 

हर कली महव-ए-ख्वाब हो जाती

तुमने डाली ना मेह्फशा नज़रे

वरना शबनम शराब हो जाती


ज़ुल्फ़-ए-बरहम सम्भाल कर चलिए

रास्ता देख भाल कर चलिए

मोसम-ए-गुल है अपनी बाँहों को 

मेरी बाँहों में डाल कर चलिए


रोज़ कब तेरी दीद होती है

एक ही दिन तो ईद होती है

कोई बदली उमड़ ही आती है

जब भी गर्मी शदीद होतो है


हाय कासिद की दिल शिकन सूरत 

जैसे ख़त की रसीद होती है

हम कलंदर जो नोश करते है

उस नज़र की कशीद होती है

SAD GAZAL SHAYARI STATUS HINDI


उम्र जलवो में बशर हो ये जरूरी तो नहीं

हर शब-ए-गम की सहर हो ये जरूरी तो नहीं

नींद तो दर्द के बिस्तर पे भी आ सकती है

उनकी आगोस में सर हो ये जरूरी तो नहीं


आग को खेल, पतंगो ने समझ रखा है

सबको अंजाम का डर हो ये जरूरी तो नहीं

शैख़ करता है जो मस्जिद में खुदा को सजदे

इसके सजदो में असर हो ये जरूरी तो नहीं


सब की साकी पे नज़र हो ये जरूरी है मगर

सब पे साकी की नज़र हो ये जरूरी तो नहीं


कोई दिल में लिए अरमान चला जाता है

कोई खोए हुए एहसान चला जाता है

हुस्न वालो से ये कहदो के ना निकले बाहिर

देखने वालो का इमान चला जाता है


मस्त नजरो से अल्लाह अल्लाह बचाए 

मस्त नजरो से अल्लाह अल्लाह बचाए


मस्त नजरो से अल्लाह अल्लाह बचाए 

महजमालो से अल्लाह बचाए


देखा किए वो मस्त निगाहों से बार बार

जब तक चराग आई कई दौर चल गए

बस.........


अल्लाह अल्लाह बचाए  मस्त नजरो से 

अल्लाह अल्लाह बचाए मस्त नजरो से


बेशाखता उठी जो वो तौबा सीकन निगाह

खुद मुझको शक हुआ के मुसल्मा नहीं रहा

बस.......


अल्लाह अल्लाह बचाए  मस्त नजरो से 

अल्लाह अल्लाह बचाए मस्त नजरो से


अक्ल सर्द शोला है, इश्क गर्म पानी है

आपकी जवानी फिर आपकी जवानी है

लोग इस बहाने से वादाकश  ना हो जाए

आपकी निगाहों का रंग अर्गवानी है

बस.......


अल्लाह अल्लाह बचाए  मस्त नजरो से 

अल्लाह अल्लाह बचाए मस्त नजरो से

SAD GAZAL SHAYARI STATUS HINDI


मस्त नजरो का असर हमने यही देखा है

रंग बरसाए तो मोसम को गुलाबी कर दे

रिंद फिर रिंद है रिन्दों की हकीक़त क्या है

ये अगर चाहे तो जाहिद को शराबी कर दे


अल्लाह अल्लाह बचाए  मस्त नजरो से 

अल्लाह अल्लाह बचाए मस्त नजरो से


जलवा-ए-महताब से पहले

रंग महके गुलाब से पहले

अपना कैफ-ओ-सुरूर दिखला कर

होश लुटे शराब से पहले

बस.......


अल्लाह अल्लाह बचाए  मस्त नजरो से 

अल्लाह अल्लाह बचाए मस्त नजरो से


मयकशी में डूब जाए और चिल्ला छोड़ दे

मस्जिदों में बैठने वाला मुसल्ला छोड़ दे

क्या से क्या हो जाए तेरी मस्त नज़रे देख कर

काफरी अपना ऐ जाहिद अल्लाह अल्लाह छोड़ दे


अल्लाह अल्लाह बचाए  मस्त नजरो से 

अल्लाह अल्लाह बचाए मस्त नजरो से


बिगड़े वो यूँ के जैसे मोहब्बत गुनाह थी

झोली फ़क़ीर की थी के मेरी निगाह थी

महशर के तश्करे तो बहुत सुन के आये थे

देखा तो एक हसीन की तिरछी निगाह थी

बस.......


अल्लाह अल्लाह बचाए  मस्त नजरो से 

अल्लाह अल्लाह बचाए मस्त नजरो से


खुदा बचाए तेरी मस्त मस्त आँखों से

फ़रिश्ता हो तो बहक जाए आदमी क्या है


अल्लाह अल्लाह बचाए  मस्त नजरो से 

अल्लाह अल्लाह बचाए मस्त नजरो से


मस्त नजरो से अल्लाह अल्लाह बचाए 

महजमालो से अल्लाह बचाए


मस्त नजरो से अल्लाह अल्लाह बचाए 

महजमालो से अल्लाह बचाए

हर बाला सर पे आजाए लेकिन

हुस्न वालो से अल्लाह बचाए


जिससे हस कर कलाम करते है

काम उसका तमाम करते है

आंख उठाते है हुस्न वाले जिधर

दूर तक क़त्ल-ए-आम करते है

बस.......


अल्लाह अल्लाह बचाए  हुस्न वालो से 

अल्लाह अल्लाह बचाए हुस्न वालो से

SAD GAZAL SHAYARI STATUS HINDI


हर बाला सर पे आजाए लेकिन

हुस्न वालो से अल्लाह बचाए

इनकी मासूमियत पर ना जाना

इनके धोखे में हरगिज ना आना

लुट लेते है ये मुस्कुरा कर 

इनकी चालो से अल्लाह बचाए


ज़रा बच के चलना 

सम्भलना सम्भलना

क्यूके ये लुट लेते है



जलक रुख की दिखा कर मुस्कुरा कर

ये लुट लेते है 

निगाहों को निगाहों से मिला कर

ये लुट लेते है

अच्छी पर्दादारी है ये अच्छी दिलनवाजी है

हसा कर लुट लेते है रुला कर

ये लुट लेते है



अमीर इस रास्ते से जो गुजरते है वो कहते है

मोहल्ला है हसीनो का के कज्जाको की बस्ती है


इश्क वाले दगा नहीं करते

हुस्न वाले वफ़ा नहीं करते

जुल्म करना तो इनकी आदत है

ये किसी का भला नहीं करते 

बस......



लुट लेते है ये मुस्कुरा कर 

इनकी चालो से अल्लाह बचाए

भोली सूरत है बाते है भोली

मुह में कुछ है मगर दिल में कुछ है

लाख चेहरा सही चाँद जैसा

दिल के कालो से अल्लाह बचाए


दिल में है ख्वाहिश-ए-हुर-ओ-जन्नत

और ज़ाहिर में शौक-ए-इबादत

बस हमे शैख़ जी आप जैसे

अल्लाह वालो से अल्लाह बचाए


इनकी फितरत में है बेवफाई

ऐ जानती है ये सारी खुदाई

अच्छे अच्छो को देते है धोखा

भोले भालो से अल्लाह बचाए


दुनिया में हसीनो से कभी दिल ना लगाना

ये लोग किसी से भी मोहब्बत नहीं करते


अच्छे अच्छो को देते है धोखा

भोले भालो से अल्लाह बचाए


मस्त नजरो से अल्लाह अल्लाह बचाए 

महजमालो से अल्लाह बचाए


उनकी मस्त आखो से कुछ ऐसे अक़ीदत हो गयी 

जाम मज़हब बन गया सहबा शरीयत हो गयी ..


पहले पीते थे कोई माकूल मौका देख कर

रफ़्ता रफ़्ता बे-सबब पीने की आदत हो गयी ..


एक सितारा ,एक कली ,एक मय  का कतरा ,एक ज़ुलफ

जब इक्कठे हो गये तमीर-ए-जन्नत हो गयी ...


❤❤❤❤

SAD GAZAL SHAYARI STATUS HINDI


तू जो बदला है ये भी  बता  दे मुझे  क्या ,तू किस्मत मेरी भी बदल जाएगा

मेरे पहलू से उठ कर तू जाता है,  क्या तू दिल से भी मेरे निकल जाएगा


बेगैर तुम्हारे जी के करूगा भी क्या तोड़ दो अब मेरे दिल का हर आसरा

जान बाकी है कर दूँगा  वो भी फिदा ये भी अरमा  तुम्हारा निकल जाएगा..


क्या-क्या सदमे ना गुज़रे मेरी जान पे,याद तुमने किया ना  मुझको  भूल कर

सारी दुनिया तो बदली है मुझसे  मगर क्या खबर थी के तू भी बदल जाएगा...

❤❤❤❤


जिंदगी जबर-ए-मुसलसल की तरह कटी है

जाने किस जुर्म की पाई है सज़ा  याद नही

मैने पलकों  से दर-ए-यार पे दस्तक दी है

मै  वो साहिल हू जिसे कोई सदा  याद नही..


❤❤❤❤


मुबारक़ हो आस भी आज मेरी भुज गयी

तेरे हिजर की रात भी आज लूट गयी 

जिसको ख़तम करने की ज़िद थी उन खवाबो की तबीर भी भुज गयी 

मातम  करू या खुशी मनाऊ  मेरे इश्क़ की शम्मा आज भुज गयी ..



❤❤❤❤


तू तो नही आया तेरी याद आके तेरा वादा  यार वफ़ा कर गयी 

मेरे को ताक रही पल पल तेरी बेचानी मेरा चैन तबाह कर गयी

देखा तो लगा के तुम आए मुझे  लगा असर दुआ कर गयी 

जब देखा तो कुछ भी नही था शायद  मेरे साथ मज़ाक हवा कर गयी ...


❤❤❤❤


हुजूर-ए-हुस्न से ही ताक़त-ए-सवाल-ओ-जवाब

तेरे करम ने ही मेरे हौसले  बढ़ाए है

कितना दिलकश था वो शिद्दत-ए-शरम से जब तेरी नज़र शरमाई

तूने उंगली मे सियाह जुल्फ लपेटी जिस दम खुद बा खुद तेरे होठों  पे हसी आई...


❤❤❤❤


उनकी मसरूर निगाहो के करिश्मे तौबा

पाक बाज़ो को भी मैखारबना  देते है

और पाई-बा-पाई ज़ुल्म-ओ-सितम राह-ए-मोहब्बत मे " क़मर"

एक इंसान को फनकार बना  देते है..



❤❤❤❤


तेरे बेगैर कभी चैन से बसर ना हुई

ये और बात के इसकी तुझे  खबर ना हुई..

मै  कहकशा मे भी तुझे  तलाश कर लेता

मगर ये कहकशा भी तेरी रह-गुजर ना हुई

बड़ा  अजीब था तेरे दयार का रास्ता

के चाँदनी भी वहा मेरी हमसफ़र  ना हुई...


❤❤❤❤

अल्लाह रे ज़बीन-ए-शोक के सज़दो की रिक़वते 

सर को जहा झुका दिया काबा बना  दिया..

तुम हमारे बनो ना बनो है तुमको इकतियार

तक़दीर ने तुमको हमारा बना दिया...


❤❤❤❤


अगरचे एक ज़माना हो गया तर्क़-ए-तखलुफ्फ को

तुम्हारी याद अब भी तक़लीफ़ देती है..

अगर तक़लीफ़ जायज़ हो तो हम से ले खामोशी से

गीला है के दुनिया बार-बार तक़लीफ़ देती है..


❤❤❤❤


रात लंभी भी है और तारीख भी ,शब गुज़री का इंतज़ाम करो दोस्तो..

जाने फिर मिलना कब मुक़द्दर मे हो,अपनी अपनी कहानी कहो दोस्तो..

मुझको मालूम है तुम भी मेरी तरह जान और दिल उलफत मे हार आए हो

अब ये बाज़ी नए  सिरे से मुमकीन नही ,अपना अंजाम खुद सोच लो दोस्तो...



❤❤❤❤


मिलेगा क्या किसी मजबूर  को सताने से 

खुदा से वास्ते  बाज़ आ जा दिल दुखाने से

तमाम  उमर के रोने से ये बेहतर था

के बाज़ रहता मै  एक बार दिल लगाने से...


❤❤❤❤


 तस्लीम  अपना गुनाह कर रहा हू

हा मै फिर मोहब्बत कर रहा हू...


❤❤❤❤


राज़-ए-दिल क्यू ना कहु  सामने दीवानो के

ये तो वो लोग है जो अपनो के ना बेगानो के..


वो भी क्या दौर थे साक़ी तेरे मस्तानो के

रास्ते राह तका करते थे मैखानो के...


वो भी क्या दिन थे इधर शाम उधर हाथ मे जाम

अब तो रास्ते भी रहे याद ना मैखानो के..

❤❤❤❤


इस मय के तरन्नुम मे जवानी को डूबा दे

नेकी का अगर दाग भी दिल मे है है तो धो दे

यू जाम उठा झूम के रह जाए ज़माना

मैखाने का दर चूम के रह जाए ज़माना...


❤❤❤❤


नगमा-ए-इश्क़ सुनाता हू मै इस शान के साथ

रक्ष करता है ज़माना मेरे वज़दान के साथ ..


है मेरा जोक-ए-जूनू कुफ्रो खीरत की ज़द मे

ए  खुदा अब तो उठा ले मुझे  ईमान के साथ..


गम-ए-जाना-गम-ए-हस्ती -गम-ए-हालत

क्या कहु कितनी बालाए है मेरी जान के साथ..


❤❤❤❤


गम-ए-जहा के फसाने तलाश करते है

ये फीतनगर तो बहाने तलाश करते है..

ये इंतेहा है जूनू-ए-हवस परस्ती की

पराए घर मे ख़ज़ाने तलाश करते है...


❤❤❤❤


कोई आरज़ू नही है कोई मुद्दा नही है

तेरा गम रहे सलामत मेरे दिल मे क्या नही है...


कहा जाम-ए-गम की तल्खी कहा जिंदगी का दरमा 

मुझे वो दवा  मिली है जो मेरी दवा नही है...


तू बचाए लाख दामन  मेरा फिर भी ये है दावा 

तेरे दिल मे मै ही मै  हू कोई दूसरा नही है..


❤❤❤❤



तुम्हें कह दिया सितमगर ये कुसूर था जुबां  का

मुझे  तुम माफ़ कर दो मेरा दिल बुरा नही है..


मुझे  दोस्त कहने वाले  जरा दोस्ती निभाले

ये मुतालबा है हक़ का कोई इलतज़ा नही है..


मेरी आँख ने भी तुझको  बा-खुदा मुझसा  पाया

मै  समझ रहा था मुझसा कोई दूसरा नही है..



क्या कीजिए शिकवा दूरी का मिलना भी ग़ज़ब हो जाता है

जब सामने वो आ जाते है एहसास-ए-अदब हो जाता है..

मालूम है दिल की फीतनागरी फिर भी तो निभाना पड़ता है

इस  इश्क़ मे अक्सर दुश्मन को सीने से लगाना पड़ता है..


❤❤❤❤


अब तो खुशी का गम है ना,गम की ख़ुशी मुझे 

बेहिश बना चुकी है बहुत जिंदगी मुझे ..

यू दिए फरेब मोहब्बत के उमर भर

मै जिंदगी को याद करू और जिंदगी मुझे ..


❤❤❤❤

 न बची जीने की चाहत, तो मौत का सामान ढूंढता है !

क्या हुआ है दिल को, कि कफ़न की दुकान ढूंढता है !


समझाता हूँ बहुत कि जी ले आज के युग में भी थोड़ा,

मगर वो है कि बस, अपने अतीत के निशान ढूंढता है !


मैं अब कहाँ से लाऊं वो निश्छल प्यार वो अटूट रिश्ते ,

बस वो है कि हर सख़्श में, सत्य और ईमान ढूंढता है !


दिखाई पड़ते हैं उसे दुनिया में न जाने कितने हीअपने,

मगर वो तो हर किसी में, अपने लिए सम्मान ढूंढता है !


मूर्ख है “मिश्र” न समझा आज के रिश्तों की हक़ीक़त,

अब रिश्तों से मुक्ति पाने को, आदमी इल्ज़ाम ढूंढता है !


Submitted By : शांती स्वरूप मिश्र


दुनिया के दिए ज़ख्मों के, निशान अभी बाकी हैं !

हम जी रहे हैं इसलिए कि, अरमान अभी बाकी हैं !

देख कर हमें बदल देते हैं लोग अपना रास्ता अब,

शायद आते हैं वो ये देखने कि, प्राण अभी बाकी हैं !

छोड़ देते ये शहर ये गलियां सदा के लिए हम तो,

पर क्या करें कुछ लोगों के, अहसान अभी बाकी हैं !

“मिश्र” लुट तो चुके हैं हम इस दुनिया के बाजार में,

पर घर में मेरी यादों के कुछ, सामान अभी बाकी हैं !



खिदर बनके रहे ज़माने मे

खुद जब भटके तो रास्ता ना मिले

रोशनी बाँटते  रहे है लोगो मे

अपने घर के लिए दिया ना मिला..

Post a Comment

0 Comments