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besthindipoetry kavitakosh हिंदी कविता Hindi Kavita Latest Shayari in Hindishayarify

Besthindipoetry kavitakosh  हिंदी कविता Hindi Kavita  Latest Shayari in Hindishayarify

 काश,जिंदगी सचमुच किताब होती

पढ़ सकता मैं कि आगे क्या होगा? 

क्या पाऊँगा मैं और क्या दिल खोयेगा?

कब थोड़ी खुशी मिलेगी, कब दिल रोयेगा? 

काश जिदंगी सचमुच किताब होती,

फाड़ सकता मैं उन लम्हों को

जिन्होने मुझे रुलाया है.. 

जोड़ता कुछ पन्ने जिनकी यादों ने मुझे हँसाया है... 

खोया और कितना पाया है?

हिसाब तो लगा पाता कितना

काश जिदंगी सचमुच किताब होती,

वक्त से आँखें चुराकर पीछे चला जाता..

टूटे सपनों को फिर से अरमानों से सजाता

कुछ पल के लिये मैं भी मुस्कुराता, 

काश, जिदंगी सचमुच किताब होती।


Latest Shayari in Hindishayarify


पूछा जो मैंने एक दिन खुदा से, 

अंदर मेरे ये कैसा शोर है, 

हंसा मुझ पर फिर बोला, 

चाहतें तेरी कुछ और थी, 

पर तेरा रास्ता कुछ और है, 

रूह को संभालना था तुझे, 

पर सूरत सँवारने पर तेरा जोर है, 

खुला आसमान, चांद, तारे चाहत है तेरी, 

पर बन्द दीवारों को सजाने पर तेरा जोर है, 

सपने देखता है खुली फिजाओं के, 

पर बड़े शहरों में बसने की कोशिश पुरजोर है..


Journey of Life Poem in Hindi


वो बचपन भी कितना सुहाना था, 

जिसका रोज एक नया फसाना था ।

कभी पापा के कंधो का, 

तो कभी मां के आँचल का सहारा था। 

कभी बेफिक्रे मिट्टी के खेल का, 

तो कभी दोस्तो का साथ मस्ताना था ।

कभी नंगे पाँव वो दोड का, 

तो कभी पतंग ना पकड़ पाने का पछतावा था ।

कभी बिन आँसू रोने का,

तो कभी बात मनवाने का बहाना था

सच कहूँ तो वो दिन ही हसीन थे, 

ना कुछ छिपाना और दिल मे जो आए बताना था ।


Hindi Me Kavita on Life


अभी से सारी सारी रात नींद ना आती

आगे तो पता नही क्या क्या होगा

परेशान माँ ने डाट दिया तंग होकर

जिन्दगी के पहले कडवे सच मिल रहे है


चलो आज घुटनों पर शहर घुमा जाये

मेरे दाता ये दुनिया कितनी बड़ी है

सारा दिन घूम कर इधर से उधर

आखिर में थककर नींद आ जाती है


आज पहली बार खुद के पैरों पर बाहर आये हैं

जाने कहाँ भाग रहा है सारा शहर

किसी के पास वक्त नही एक पल ठहरने का

घर वापिस चलो माँ को चिंता हो रही होगी


आज व्यस्क हो चूका हूँ

बचपन जवानी बुढ़ापा सब समझ आ रहा है

पड़ोस से किसी बुजुर्ग के मरने की खबर आई

आदमी धरती पर आता है सिर्फ मरने के लिये


फलसफा समझो न असरारे सियासत समझो,

जिन्दगी सिर्फ हकीक़त है हकीक़त समझो,

जाने किस दिन हो हवायें भी नीलाम यहाँ,

आज तो साँस भी लेते हो ग़नीमत समझो।


समझने ही नहीं देती सियासत हम को सच्चाई,

कभी चेहरा नहीं मिलता कभी दर्पन नहीं मिलता।


जो तीर भी आता वो खाली नहीं जाता,

मायूस मेरे दिल से सवाली नहीं जाता,

काँटे ही किया करते हैं फूलों की हिफाज़त,

फूलों को बचाने कोई माली नहीं जाता।


अब ना मैं हूँ, ना बाकी हैं ज़माने मेरे​,

फिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरे​,

ज़िन्दगी है तो नए ज़ख्म भी लग जाएंगे​,

अब भी बाकी हैं कई दोस्त पुराने मेरे।


कहीं बेहतर है तेरी अमीरी से मुफलिसी मेरी,

चंद सिक्कों की खातिर तूने क्या नहीं खोया है,

माना नहीं है मखमल का बिछौना मेरे पास,

पर तू ये बता कितनी रातें चैन से सोया है।


हमारा ज़िक्र भी अब जुर्म हो गया है वहाँ,

दिनों की बात है महफ़िल की आबरू हम थे,

ख़याल था कि ये पथराव रोक दें चल कर,

जो होश आया तो देखा लहू लहू हम थे।


जरुरी तो नहीं जीने के लिए सहारा हो,

जरुरी तो नहीं हम जिनके हैं वो हमारा हो,

कुछ कश्तियाँ डूब भी जाया करती हैं,

जरुरी तो नहीं हर कश्ती का किनारा हो।


 More Shayari


खामोशी से बिखरना आ गया है,

हमें अब खुद उजड़ना आ गया है,

किसी को बेवफा कहते नहीं हम,

हमें भी अब बदलना आ गया है,

किसी की याद में रोते नहीं हम,

हमें चुपचाप जलना आ गया है,

गुलाबों को तुम अपने पास ही रखो,

हमें कांटों पे चलना आ गया है।


वक़्त नूर को बेनूर कर देता है,

छोटे से जख्म को नासूर कर देता है,

कौन चाहता है अपनों से दूर रहना,

पर वक़्त सबको मजबूर कर देता है।


More Shayari

Latest Shayari in Hindishayarify


न जी भर के देखा न कुछ बात की,

बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की।


कई साल से कुछ ख़बर ही नहीं,

कहाँ दिन गुज़ारा कहाँ रात की।


उजालों की परियाँ नहाने लगीं,

नदी गुनगुनाई ख़यालात की।


Hindi Shayari


एक चेहरा जो मेरे ख्वाब सजा देता है,

मुझ को मेरे ही ख्यालों में सदा देता है।


वो मेरा कौन है मालूम नहीं है लेकिन,

जब भी मिलता है तो पहलू में जगा देता है।


जरुरी तो नहीं जीने के लिए सहारा हो,

जरुरी तो नहीं हम जिनके हैं वो हमारा हो,

कुछ कश्तियाँ डूब भी जाया करती हैं,

जरुरी तो नहीं हर कश्ती का किनारा हो।


खामोशी से बिखरना आ गया है,

हमें अब खुद उजड़ना आ गया है,

किसी को बेवफा कहते नहीं हम,

हमें भी अब बदलना आ गया है,

किसी की याद में रोते नहीं हम,

हमें चुपचाप जलना आ गया है,

गुलाबों को तुम अपने पास ही रखो,

हमें कांटों पे चलना आ गया है।


वक़्त नूर को बेनूर कर देता है,

छोटे से जख्म को नासूर कर देता है,

कौन चाहता है अपनों से दूर रहना,

पर वक़्त सबको मजबूर कर देता है।


न जी भर के देखा न कुछ बात की,

बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की।


कई साल से कुछ ख़बर ही नहीं,

कहाँ दिन गुज़ारा कहाँ रात की।

उजालों की परियाँ नहाने लगीं,

नदी गुनगुनाई ख़यालात की।



एक चेहरा जो मेरे ख्वाब सजा देता है,

मुझ को मेरे ही ख्यालों में सदा देता है।


वो मेरा कौन है मालूम नहीं है लेकिन,

जब भी मिलता है तो पहलू में जगा देता है।


दिल की दहलीज पर यादों के दिए रखें हैं,

आज तक हम ने ये दरवाजे खुले रखे हैं।


इस कहानी के वो किरदार कहाँ से लाऊं,

वो ही दरिया है वो ही कच्चे घड़े रखे हैं।


दिन की रोशनी ख्वाबों को सजाने में गुजर गई,

रात की नींद बच्चे को सुलाने मे गुजर गई,

जिस घर मे मेरे नाम की तखती भी नहीं,

सारी उमर उस घर को बनाने में गुजर गई।


फूल इसलिये अच्छे कि खुश्बू का पैगाम देते हैं,

कांटे इसलिये अच्छे कि दामन थाम लेते हैं,

दोस्त इसलिये अच्छे कि वो मुझ पर जान देते हैं,

और दुश्मनों को मैं कैसे खराब कह दूं...

वो ही तो हैं जो महफिल में मेरा नाम लेते हैं।

 

सरे बाज़ार निकलूं तो आवारगी की तोहमत,

तन्हाई में बैठूं तो इल्जाम-ए-मोहब्बत।


ना शाखों ने पनाह दी,ना हवाओ ने बक्शा,

वो पत्ता आवारा ना बनता तो क्या करता।


अजीब मिठास है मुझ गरीब के खून में भी,

जिसे भी मौका मिलता है वो पीता जरुर है।


सुला दिया माँ ने भूखे बच्चे को ये कहकर,

परियां आएंगी सपनों में रोटियां लेकर।


कुछ दर्द कुछ नमी कुछ बातें जुदाई की,

गुजर गया ख्यालों से तेरी याद का मौसम।


कभी टूटा नहीं दिल से तेरी याद का रिश्ता,

गुफ्तगू हो न हो ख्याल तेरा ही रहता है।



तेरी चाहत में रुसवा यूँ सरे बाज़ार हो गये,

हमने ही दिल खोया और हम ही गुनहगार हो गये।


जमाने भर की रुसवाईयाँ और बेचैन रातें,

ऐ दिल कुछ तो बता ये माजरा क्या है।


 Shayari


वही रखेगा मेरे घर को बलाओं से महफूज,

जो शजर से घोसला गिरने नहीं देता।


हवा खिलाफ थी लेकिन चिराग भी खूब जला,

खुदा भी अपने होने का क्या क्या सबूत देता है।


अब मायूस क्यूँ हो उस की बेवफाई पे फ़राज़,

तुम खुद ही तो कहते थे कि वो सबसे जुदा है।


इन बारिशों से दोस्ती अच्छी नहीं फराज,

कच्चा तेरा मकाँ है कुछ तो ख्याल कर।


क्या गिला करें तेरी मजबूरियों का हम,

तू भी इंसान है कोई खुदा तो नहीं,

मेरा वक़्त जो होता मेरे मुनासिब,

मजबूरिओं को बेच कर तेरा दिल खरीद लेता।


क्या बयान करें तेरी मासूमियत को शायरी में हम,

तू लाख गुनाह कर ले सजा तुझको नहीं मिलनी।


दम तोड़ जाती है हर शिकायत, लबों पे आकर,

जब मासूमियत से वो कहती है, मैंने क्या किया है?


मुझ में ख़ुशबू बसी उसी की है,

जैसे ये ज़िंदगी उसी की है।


वो कहीं आस-पास है मौजूद,

हू-ब-हू ये हँसी उसी की है।


ये मत पूछ के एहसास की शिद्दत क्या थी,

धूप ऐसी थी के साए को भी जलते देखा।


इतनी चाहत के बाद भी तुझे एहसास ना हुआ,

जरा देख तो ले दिल की जगह पत्थर तो नहीं।


More Shayari

 

अपने होंठों पर सजाना चाहता हूँ,

आ तुझे मैं गुन गुनाना चाहता हूँ।


कोई आँसू तेरे दामन पर गिरा कर,

बूँद को मोती बनाना चाहता हूँ।


Read More Shayari

कितने परवाने जले राज़ ये पाने के लिए,

शमां जलने के लिए हैं या जलाने के लिए।


किसी को प्यार का मतलब बस इतना सा समझाना,

शमा के पास जाकर के परवाने का जल जाना।

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